Ayodhya Ram Mandir Donation Row: अयोध्या के राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए और दिए गए दान में कथित वित्तीय अनियमितताओं और हेरफेर के मामले ने तूल पकड़ लिया है। इस संवेदनशील मुद्दे पर अब विश्व हिंदू परिषद (VHP) के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने बेहद कड़ा रुख अख्तियार किया है। गुरुवार को नई दिल्ली में मीडिया से बात करते हुए उन्होंने इस मामले में तत्काल FIR दर्ज करने और उत्तर प्रदेश पुलिस के सबसे बेहतरीन और सक्षम अधिकारियों को जांच में तैनात करने की पुरजोर मांग की है।
आलोक कुमार ने की फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई की मांग (फाइल फोटो | PTI)
ANI से बातचीत में VHP प्रमुख ने दो टूक शब्दों में कहा कि इस मामले में किसी भी आरोपी को न तो बचाया जाना चाहिए और न ही किसी का पक्ष लिया जाना चाहिए। उन्होंने इच्छा जताई कि इस मामले की सुनवाई फास्ट-ट्रैक कोर्ट में रोज होनी चाहिए ताकि 4 महीने के भीतर दोषियों को सलाखों के पीछे भेजा जा सके, जिससे हिंदू समाज को संतोष मिले।
SIT ने सौंपी शुरुआती रिपोर्ट
यह बयान ऐसे समय में आया है जब मंगलवार को ही उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) ने अपनी प्रारंभिक जांच रिपोर्ट अपर मुख्य सचिव (गृह) संजय प्रसाद को सौंप दी है। हालांकि, SIT के सदस्य विजय विश्वास पंत (मंडलायुक्त, लखनऊ) ने रिपोर्ट की सामग्री को फिलहाल पूरी तरह गोपनीय बताया है। रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद कानूनी कदम उठाने पर जोर देते हुए VHP अध्यक्ष आलोक कुमार ने कहा कि यह एक तार्किक कदम है। भले ही SIT की आधिकारिक रिपोर्ट अभी हमारे हाथ में नहीं है, लेकिन सभी का कहना है कि इसमें शामिल लोगों की पहचान की जा चुकी है। यह सब CCTV फुटेज के आधार पर किया गया है। अब मामला उस चरण में पहुंच चुका है जहां पुलिस को तुरंत बिना किसी देरी के FIR दर्ज करनी चाहिए। आलोक कुमार ने यह भी जोड़ा कि जांच पूरी तरह निष्पक्ष होनी चाहिए, जिसमें शामिल हर एक संदिग्ध से पूछताछ हो और किसी पर भी कोई राजनीतिक या बाहरी दबाव न हो।
चंपत राय के इस्तीफे की खबरों पर क्या बोले VHP प्रमुख?
जब आलोक कुमार से उन मीडिया रिपोर्ट्स के बारे में पूछा गया जिनमें दावा किया जा रहा था कि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय समेत कुछ लोगों ने नैतिक आधार पर इस्तीफा दे दिया है, तो उन्होंने कहा कि मुझे ऐसे किसी इस्तीफे की जानकारी नहीं है। अगर कोई इस्तीफा देता भी है, तो वह केवल नैतिक जिम्मेदारी के कारण नहीं, बल्कि इसलिए भी हो सकता है ताकि जांच प्रभावित न हो। हालांकि, मैं उन्हें कोई सलाह नहीं दे रहा हूं, वे दृढ़ विवेक वाले लोग हैं और वही करेंगे जो सही होगा।
व्यवस्था में सुधार को लेकर उन्होंने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि राम मंदिर का निर्माण और चंदे का प्रबंधन केवल भरोसे पर नहीं छोड़ा जा सकता। अब वहां एक प्रोफेशनल मैनेजमेंट स्थापित करना अनिवार्य है। मंदिर में एक अनुभवी व्यक्ति को मुख्य भूमिका में होना चाहिए, एक पुख्ता मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) और ऐसी 'फूल-प्रूफ' व्यवस्था होनी चाहिए जिससे एक पैसे की भी हेरफेर न हो सके। तभी जनता का अटूट विश्वास फिर से बहाल होगा।
