Ayodhya Ram Mandir donation scam: अयोध्या के भव्य राम मंदिर के दान और चढ़ावे में हुई करोड़ों रुपये की हेराफेरी (Donation Irregularities) मामले में अयोध्या पुलिस की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, चौंकाने वाले और डरावने खुलासे सामने आ रहे हैं। पुलिस कस्टडी और जेल में हुई पूछताछ के बाद इस पूरे 'दान घोटाले' की जो इनसाइड स्टोरी सामने आई है, उसने राम भक्तों और प्रशासन दोनों को सन्न कर दिया है।
अयोध्या राम मंदिर घोटाला: 'कुंभ' के दौरान हुई सबसे ज्यादा चोरी, जीजा-साले ने खरीदीं प्रॉपर्टीज, पुलिस का बड़ा खुलासा
पुलिस की तफ्तीश में साफ हो गया है कि आस्था की आड़ में चल रहा यह खेल कोई छोटी-मोटी चोरी नहीं, बल्कि सोची-समझी साजिश के तहत अंजाम दिया गया एक महाघोटाला था।
'कुंभ' के मेले में आया रिकॉर्ड चढ़ावा
अयोध्या पुलिस की जांच में जो सबसे बड़ा और सनसनीखेज खुलासा हुआ है, वह 'कुंभ' के समय से जुड़ा है। पूछताछ में पता चला है कि कुंभ के दौरान राम मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में भारी इजाफा हुआ था, जिसके चलते मंदिर के चढ़ावे और दान में भी कई गुना की बंपर बढ़ोतरी हुई।
रोजाना आने वाले नोटों के इस भारी अंबार को ही आरोपियों ने आपदा में अवसर बना लिया। जब नोटों की गिनती का दबाव सबसे ज्यादा था, तब सभी 8 आरोपियों ने मिलकर एक सोची-समझी प्लानिंग के तहत दान के पैसों को गायब करना शुरू किया। पुलिस के मुताबिक, कुंभ के दौरान ही मंदिर के खजाने में सबसे बड़ी सेंधमारी की गई।
जांच में यह भी सामने आया है कि गिरफ्तार किए गए 8 आरोपियों में से कुछ शातिर आरोपी कुंभ से पहले भी मौका पाकर दान के पैसों में 'हल्की-फुल्की' चोरी किया करते थे। जब वे पकड़े नहीं गए, तो उनका हौसला बढ़ गया और उन्होंने कुंभ के वक्त बड़ी डकैती का पूरा प्लान तैयार कर लिया।
जीजा-साले की जोड़ी ने की सबसे बड़ी लूट
इस पूरे रैकेट का मास्टरमाइंड और सबसे ज्यादा फायदा उठाने वाले चेहरे भी अब बेनकाब हो चुके हैं। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, रिश्ते में जीजा-साले लगने वाले दो मुख्य आरोपियों- लवकुश मिश्रा और अनुकल्प मिश्रा ने मिलकर सबसे ज्यादा कैश पर हाथ साफ किया था।
चोरी किए इस पवित्र पैसे को इन दोनों ने अय्याशी और प्रॉपर्टी बाजार में जमकर बहाया। पुलिस की शुरुआती जांच में लवकुश और अनुकल्प की 5 से 6 ऐसी संपत्तियों (Properties) और भारी खरीदारी की जानकारी हाथ लगी है, जो इन्होंने हाल ही में खरीदी थीं। पुलिस अब इन बेनामी संपत्तियों के दस्तावेज खंगाल रही है।
जांच में शामिल हुआ इनकम टैक्स विभाग
मामला सिर्फ सामान्य चोरी का नहीं बल्कि करोड़ों रुपये के काले धन और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा नजर आ रहा है। यही वजह है कि अयोध्या पुलिस अब अकेले जांच नहीं कर रही है। आरोपियों के वित्तीय साम्राज्य और काली कमाई का पूरी तरह पर्दाफाश करने के लिए अयोध्या पुलिस ने अब इनकम टैक्स विभाग की भी मदद ली है।
आयकर विभाग की टीम अब आरोपियों के बैंक खातों, घोषित आय और खरीदी गई संपत्तियों के स्रोतों की बारीक वित्तीय जांच कर रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि मंदिर के चढ़ावे का कुल कितना पैसा प्रॉपर्टीज में इन्वेस्ट किया गया है।
जेल के अंदर टूटेगा राज: जल्द होने वाला है और बड़ा एक्शन
फिलहाल सभी आरोपी सलाखों के पीछे हैं, लेकिन पुलिस का काम अभी खत्म नहीं हुआ है। जेल में बंद इन आरोपियों से पुलिस और वित्तीय एजेंसियों की टीम लगातार कड़ी पूछताछ कर रही है। अयोध्या पुलिस के आला अधिकारियों का संकेत है कि जेल में हो रही इस पूछताछ से कुछ और रसूखदार लोगों के नाम सामने आ सकते हैं, जिन्होंने इस सिंडिकेट को बैंक और मंदिर प्रशासन के अंदर से मदद पहुंचाई थी। माना जा रहा है कि इन बयानों के आधार पर अयोध्या पुलिस बहुत जल्द कुछ और बड़े और कड़े एक्शन ले सकती है, जिससे इस घोटाले से जुड़े कई और सफेदपोश चेहरे बेनकाब होंगे।
