Allahabad High Court Stays FIR Journalist: सरकारी स्कूल की बदहाल स्थिति को उजागर करने वाले पत्रकार के विरुद्ध दर्ज प्राथमिकी पर इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने रोक लगा दी है। अदालत ने कहा कि पत्रकार द्वारा स्कूल की कमियों को उजागर किए जाने के बाद उसके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई जो प्रथम दृष्टया प्रतिशोधात्मक कार्रवाई प्रतीत होती है।
'आईना दिखाने वाले को ही दोषी ठहराना प्रतिशोध': सरकारी स्कूल की बदहाली उजागर करने वाले पत्रकार की FIR पर इलाहाबाद HC की रोक
उच्च न्यायालय ने यह भी कहा कि पत्रकार द्वारा सरकारी विद्यालय की कमियों को उजागर करने के बाद उसके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करना ’आईना दिखाने वाले को ही दोषी ठहराने’ जैसा है। इसी के साथ अदालत ने अपर मुख्य सचिव, बेसिक शिक्षा विभाग को व्यक्तिगत रूप से हलफनामा दाखिल करने का भी निर्देश दिया जिसमें उन्हें संबंधित स्कूल की वर्तमान स्थिति के साथ स्कूल परिसर की तस्वीरें भी दाखिल करने को कहा गया है।
पत्रकार अमित यादव की याचिका पर फैसला
यह आदेश न्यायमूर्ति अब्दुल मोईन और न्यायमूर्ति प्रमोद कुमार श्रीवास्तव की पीठ ने पत्रकार अमित यादव की याचिका पर पारित किया। याची के विरुद्ध गोसाईगंज थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई है।
याची की ओर से दलील दी गई कि वह पत्रकार के रूप में पूर्व माध्यमिक विद्यालय, बेगरिया मऊ, गोसाईंगंज, लखनऊ गया था, जहां स्कूल के शौचालय बदहाल स्थिति में थे व छात्रों के लिए पेयजल की व्यवस्था भी नहीं थी। इस विषय पर उसने कुछ शिक्षकों के साक्षात्कार भी लिए थे। रिपोर्टिंग के चार दिन बाद 24 अगस्त को उसके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई।
बता दें कि पिछले कुछ समय में ऐसे मामले सामने आए हैं, जहां सच्चाई दिखाना पत्रकारों को भारी पड़ी है। सरकार व अधिकारी जो पत्रकारों के हितों की रक्षा करने का दावा करते नहीं थकते, वह इन मामलों को पूरी तरह नजरअंदाज कर देते हैं। देख जाए तो इसके पीछे सरकारी तंत्र ही होता है और जैसा कि अदालत ने भी कहा कि आईना दिखाना कैसे प्रतिशोध का कारण बन सकता है, वो ये मामला साफ तौर पर दिखाता है।
