भारत की संप्रभुता और अखंडता को चुनौती...तौकीर रजा का नारा बना उनके गले की फांस, इलाहाबाद हाईकोर्ट से नहीं मिली जमानत

Uttar Pradesh News: मौलाना तौकीर रजा (Tauqir Raza) की जमानत अर्जी खारिज कर दी गई है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ’’गुस्ताख-ए-नबी के एक ही सजा, सर तन से जुदा, सर तन से जुदा’’ नारे पर सख्त टिप्पणी की है।

Uttar Pradesh News: बरेली हिंसा मामले में मौलाना तौकीर रजा (Tauqir Raza) की जमानत अर्जी इलाहाबाद हाईकोर्ट में खारिज हो गई है। तौकीर रजा को अभी जेल में ही रहना पड़ेगा। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने साफ कहा है कि तौकीर रजा ने जो नारे लगाए थे, वो भारत की संप्रभुता और अखंडता को चुनौती देने वाली थी। न्यायमूर्ति आशुतोष श्रीवास्तव ने सोमवार को दिए अपने आदेश में कहा कि घटना के बाद तौकीर रजा ने अपने भाषण में जो नारा लगाया, वह कानून के शासन तथा भारत की संप्रभुता और अखंडता को चुनौती था। तौकीर रजा पिछले साल सितंबर में बरेली में एक रैली के दौरान हुई हिंसा के संबंध में 13 अक्टूबर, 2025 से जेल में है।

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मौलाना तौकीर रजा को नहीं मिली जमानत (फोटो-X)

उच्च न्यायालय ने कहा कि याचिकाकर्ता के खिलाफ 21 दिसंबर, 2025 को आरोपपत्र दाखिल किया गया था, लेकिन अभी आरोप तय किए जाने बाकी हैं। सभी तथ्यों और परिस्थितियों पर विचार करने के बाद अदालत याचिकाकर्ता को जमानत पर रिहा करने के पक्ष में नहीं है इसलिए जमानत याचिका खारिज की जाती है।

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