पंजाब में पराली जलाने के मामलों में रिकॉर्ड बढ़ोतरी दर्ज की गई है। 1 नवंबर करवा चौथ के दिन पंजाब में राज्य में पराली जलाने के 1921 मामले सामने आए हैं, जोकि इस सीजन का सर्वाधिक है। पराली जलाने के मामलों में संगरूर जिला टॉप पर है, जहां पर एक ही दिन में 345 मामले सामने आए हैं। इसके अलावा तरनतारन में 226, फिरोजपुर में 200, मानसा में 157 और पटियाला में 127 मामले सामने आए हैं। इस लिहाज से सीजन में अबतक पंजाब में पराली जलाने के मामलों का आंकड़ा बढ़कर 9594 हो चुका है। इसकी वजह से उठने वाले धुआं से पंजाब के कई शहरों का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) भी लगातार बिगड़ता जा रहा है। बठिंडा का AQI 279, लुधियाना का 254, अमृतसर का 218, पटियाला का 180, मंडी गोबिंदगढ़ का 262 और जालंधर का 169 AQI रिकॉर्ड किया गया है।
पराली जलाने में टूटा इस साल का रिकॉर्ड
दिन दूना बढ़ रहे पराली के मामले
आपको बता दें कि अक्टूबर माह में पराली जलाने केस लगातार दिन दूना रात चौगुना होते हैं। 28 अक्टूबर के बाद से करीब 740 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखी गई। 30 अक्टूबर सोमवार को 1030 और मामले पंजाब से सामने आए थे। NASA की ओर से जारी की गईं तस्वीरों में साफ दिखाई दे रहा है कि पंजाब में पराली जलाने के मामलों में बेतहाशा बढ़ोतरी हो रही है। NASA की 28 अक्टूबर 2022 और इस साल 29 अक्टूबर 2023 की तस्वीर में कोई अंतर नहीं था।
31 अक्टूबर तक पजाब सरकार ने सिर्फ 625 मामलों में ही कार्रवाई कर पराली जलाने वाले किसानों पर 15.57 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। अब तक महज 2.5 लाख रुपये ही जुर्माने की राशि में से रिकवर किए जा सके हैं।
2021-22 से कम हैं आंकड़ा
साल 2021 में इस अवधि तक पंजाब में 10229 और 2022 में 13873 मामले सामने आए थे। इस साल अभी तक 9594 तक आंकड़ा पहुंच चुका है। वहीं, मान सरकार का दावा है कि इस साल इस अवधि तक पंजाब में पराली जलाने के मामलों में 50 प्रतिशत की कमी आई है। ऐसे में लगातार धुएं की गुबार उठने से राज्य के कई शहरों में वायु गुणवत्ता (AQI) लेवल काफी ज्यादा बढ़ गया है। बठिंडा का AQI 279, लुधियाना का 254, अमृतसर का 218, पटियाला का 180, मंडी गोबिंदगढ़ का 262 और जालंधर का 169 AQI रिकॉर्ड किया गया है।
किसानों की अपनी समस्या
किसानों का कहना है कि धान की फसल की कटाई करने के अगले 10 से 15 दिनों में उन्हें आलू की फसल बोनी होती है। आलू की फसल हटाने के तुरंत बाद ही उन्हें गेहूं की फसल बोने की तैयारी भी शुरू करनी होती है। ऐसे में उनके पास वक्त नहीं होता कि वो पराली का प्रबंधन कर सकें। हालांकि, पंजाब सरकार ने पराली प्रबंधन के लिए गांवों की पंचायतों और किसानों की सोसायटी को कुछ मशीने दी हैं। जो कि वो पर्याप्त नहीं हैं। इसी वजह से किसान के पास पराली जलाने के अलावा दूसरा कोई ऑप्शन नहीं बचता।
