अहमदाबाद : अहमदाबाद पुलिस ने महिला सेल, क्राइम ब्रांच और अहमदाबाद नगर निगम (AMC) के साथ मिलकर शहर में भिक्षावृत्ति, खासकर बच्चों से भिक्षावृत्ति कराने के खिलाफ एक दिवसीय मेगा ड्राइव चलाया। शहरभर में चिन्हित भिक्षावृत्ति हॉटस्पॉट्स पर संयुक्त रेस्क्यू ऑपरेशन किया गया। इस अभियान में कुल 146 लोगों का रेस्क्यू किया गया, जिसमें 74 बच्चे और 72 वयस्क शामिल हैं। रेस्क्यू किए गए लोगों को आगे की प्रक्रिया, मेडिकल जांच और पुनर्वास संबंधी कार्रवाई के लिए राणिप कम्युनिटी हॉल, गायत्री मंदिर रोड, वडिगाम सोसायटी, विजय नगर, राणिप, अहमदाबाद लाया गया।
अहमदाबाद में भिक्षावृत्ति पर बड़ा एक्शन
ऑपरेशन की निगरानी क्राइम ब्रांच DCP अजित राजियन के निर्देशन में की गई। ACP हिमाला जोशी, ईस्ट महिला सेल PI M.A. अंबालिया, वेस्ट महिला सेल PI N.B. कलसरिया और PI B.M. चौधरी के नेतृत्व में पुलिस की टीमें पूरे दिन मैदान में तैनात रहीं।
क्राइम ब्रांच JCP शरद सिंघल भी राणिप कम्युनिटी हॉल पहुंचे और रेस्क्यू किए गए लोगों की व्यवस्थाओं का जायजा लिया। उन्होंने मौके पर मौजूद अधिकारियों से जानकारी ली और रेस्क्यू व पुनर्वास से जुड़ी समस्याओं के समाधान की निगरानी की। इस अभियान में ACP, PI और पुलिसकर्मियों समेत सैकड़ों पुलिसकर्मी पूरे दिन शहर के अलग-अलग इलाकों में तैनात रहे।
जुवेनाइल जस्टिस एक्ट के तहत कार्रवाई
Times Now से बातचीत में ACP हिमाला जोशी ने बताया कि अहमदाबाद में चिन्हित सभी भिक्षावृत्ति हॉटस्पॉट्स को अभियान में कवर किया गया। उन्होंने बताया कि बच्चों को भिक्षावृत्ति में शामिल करने वाले लोगों के खिलाफ Juvenile Justice Act के तहत कार्रवाई की गई है। इसमें वे मामले भी शामिल हैं, जहां बच्चे अपने माता-पिता के साथ भिक्षावृत्ति करते पाए गए।
ट्रैफिक सिग्नल पर सामान बेचने या वाहनों के शीशे साफ करने के नाम पर ट्रैफिक में बाधा पैदा करने वालों के खिलाफ Gujarat Police Act के तहत भी कार्रवाई की जाएगी। पुलिस के मुताबिक, ऐसी गतिविधियों से वाहन चालकों के साथ-साथ सड़क पर मौजूद बच्चों की सुरक्षा को भी खतरा रहता है।
74 बच्चों की मेडिकल जांच, CWC के सामने पेशी
रेस्क्यू किए गए 74 बच्चों की मेडिकल जांच कराई गई। इसके बाद सभी बच्चों को Child Welfare Committee (CWC) के सामने पेश किया गया। CWC के आदेश के अनुसार बच्चों की आगे की कस्टडी तय की जाएगी। स्थिति और जांच के आधार पर बच्चों को उनके माता-पिता को सौंपा जा सकता है या उन्हें चिल्ड्रन होम में रखा जा सकता है।
ह्यूमन ट्रैफिकिंग एंगल की भी जांच
ACP हिमाला जोशी ने बताया कि रेस्क्यू किए गए बच्चों के मामले में ह्यूमन ट्रैफिकिंग की संभावना को भी जांचा जा रहा है। स्थानीय पुलिस की SHE Teams और अहमदाबाद क्राइम ब्रांच की Anti-Human Trafficking Unit (AHTU) बच्चों से विस्तृत पूछताछ और काउंसलिंग कर रही हैं। पुलिस यह भी जांच रही है कि किसी बच्चे की तस्करी हुई है या उसके साथ किसी तरह का दुर्व्यवहार किया गया है अथवा उसके शरीर पर चोट के निशान हैं।
रेस्क्यू और पुनर्वास की प्रक्रिया में स्वास्थ्य और शिक्षा विभाग की टीमें भी पुलिस के साथ समन्वय कर रही हैं। ACP के मुताबिक, शुरुआती पूछताछ में सामने आया है कि कई बच्चे आसपास के ग्रामीण इलाकों से अस्थायी रूप से अहमदाबाद आते हैं। इनके पास स्थायी आश्रय नहीं होने के कारण कुछ बच्चे सड़क पर छोटे-मोटे काम करते हैं और बाकी समय भिक्षावृत्ति में शामिल होते हैं।
8 में से 6 बच्चों के माता-पिता मिले
ACP हिमाला जोशी के मुताबिक, शुरुआत में 8 ऐसे बच्चे थे, जिनके माता-पिता का पता नहीं चल पाया था। पूछताछ, काउंसलिंग और जानकारी जुटाने के बाद अब तक 6 बच्चों के माता-पिता का पता लगाया जा चुका है। बाकी 2 बच्चों के माता-पिता की तलाश जारी है। आगे की काउंसलिंग और जांच के आधार पर कार्रवाई की जाएगी। तब तक पुलिस Child Welfare Committee और अन्य बाल कल्याण विभागों के साथ मिलकर बच्चों की देखभाल और पुनर्वास की प्रक्रिया आगे बढ़ाएगी।
