Banke Bihari Mandir: बांके बिहारी मंदिर कॉरिडोर और ट्रस्ट मामले में नया मोड़ आ गया है। राजस्व अभिलेखों के मुताबिक, बांके बिहारी मंदिर किसी की निजी संपत्ति नहीं है, बल्कि इसका स्थान राजस्व दस्तावेजों में गोविंद देव के नाम से दर्ज है। प्रदेश सरकार द्वारा कॉरिडोर के लिए अधिसूचना जारी करने और ट्रस्ट बनाए जाने की घोषणा के बाद इस मामले में एक और कड़ी जुड़ गई है।
बांके बिहारी मंदिर निजी संपत्ति नहीं
मंदिर के गोस्वामी दावा कर रहे हैं कि यह उनकी निजी संपत्ति है और सरकार को इसमें हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए, जबकि प्रशासनिक अधिकारी उन्हें समझाने का प्रयास कर रहे हैं। इस बीच, प्रशासन द्वारा जारी किए गए दस्तावेजों से स्पष्ट हुआ है कि मंदिर जिस स्थान पर स्थित है, वह भूमि राजस्व अभिलेखों में गोविंद देव के नाम से दर्ज है। उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद के सीईओ एसबी सिंह ने भी इसकी पुष्टि की है। जानकारी के अनुसार, मौजा वृंदावन बांगर के राजस्व अभिलेखों में बांके बिहारी मंदिर के नाम से कोई भूमि रजिस्टर नहीं है।
प्रशासनिक अधिकारों पर चर्चा
वृंदावन बॉगर के नॉन-जेडए क्षेत्र में खेवट संख्या 103, खसरा संख्या 598, कुल 299.65 एकड़ भूमि गोविंद देव जी के नाम से दर्ज है, जिसमें से कुछ हिस्से पर बांके बिहारी मंदिर निर्मित है। हालांकि, नगर निगम के गृहकर और जलकर अभिलेखों में मंदिर का नाम अंकित है, और विद्युत विभाग के रिकॉर्ड में भी मंदिर के नाम से कनेक्शन पंजीकृत है। यह मामले को और अधिक जटिल बनाता है, जिससे इसके प्रशासनिक अधिकारों पर चर्चा तेज हो गई है।
