आम आदमी पार्टी (आप) पंजाब के मीडिया इंचार्ज बलतेज पन्नू ने बादल परिवार और शिरोमणि अकाली दल पर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुर्बानियों से खड़े हुए अकाली आंदोलन को एक पारिवारिक राजनीतिक पार्टी में बदल दिया गया है। उन्होंने कहा कि सिख संस्थाओं का इस्तेमाल निजी और राजनीतिक हितों के लिए किए जाने के आरोपों पर जवाब मिलना चाहिए।
आप पंजाब के मीडिया इंचार्ज बलतेज पन्नू
प्रेस कॉन्फ्रेंस में पन्नू ने अमरजीत सिंह चावला से जुड़े विवाद का जिक्र करते हुए सवाल उठाया कि श्री आनंदपुर साहिब की एसजीपीसी सराय में एक महिला को महीनों तक रहने की सुविधा कैसे मिली। उन्होंने पूछा कि उसे आवास, वाहन और अन्य सुविधाएं किसने उपलब्ध कराईं और इसका खर्च किसने उठाया। पन्नू ने विरसा सिंह वल्टोहा और सरबजीत सिंह झिंजर की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए पूछा कि महिला को वहां लाने के पीछे क्या उद्देश्य था।
पन्नू ने एसजीपीसी अध्यक्ष हरजिंदर सिंह धामी से महिला की शिकायत पर की गई कार्रवाई को लेकर जवाब मांगा। उन्होंने पूछा कि शिकायत मिलने के बाद मामले में तत्काल कदम क्यों नहीं उठाए गए। साथ ही उन्होंने सुखबीर सिंह बादल, हरसिमरत कौर बादल और बिक्रम सिंह मजीठिया की चुप्पी पर भी सवाल उठाया।
आप नेता ने कहा कि अकाली मोर्चों का इतिहास कुर्बानियों का रहा है, लेकिन अब पार्टी पर एक परिवार का नियंत्रण दिखाई देता है। उन्होंने आरोप लगाया कि सिख संस्थाओं में राजनीतिक दखल बढ़ने से उनकी भूमिका और विश्वसनीयता प्रभावित हुई है।
पन्नू ने 2015 के बेअदबी विवाद, कोटकपूरा और बहबल कलां गोलीकांड का जिक्र करते हुए तत्कालीन बादल सरकार की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि इन घटनाओं को लेकर सिख समुदाय की भावनाओं को गंभीर चोट पहुंची थी। उन्होंने कहा कि मौजूदा विवाद को केवल एक व्यक्ति का मामला नहीं माना जाना चाहिए, बल्कि सिख संस्थाओं की जवाबदेही और पारदर्शिता के सवाल के तौर पर देखा जाना चाहिए। पन्नू ने एसजीपीसी से संबंधित मामलों में स्पष्ट कार्रवाई और जवाबदेही की मांग की।
उन्होंने सिख बुद्धिजीवियों और समुदाय से इन मुद्दों पर अपनी आवाज उठाने की अपील करते हुए कहा कि सिख संस्थाओं के संचालन में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जानी चाहिए।
