Dehradun-Delhi Expressway Update: देहरादून-दिल्ली एक्सप्रेसवे का जनता लंबे समय से इंतजार कर रही है, और अब यह जल्द खत्म होने वाली है क्योंकि इसके संकेत दिखने लगे हैं। करीब 13,000 करोड़ रुपये की लागत से बन रहा यह एक्सप्रेसवे चार चरणों में तैयार किया जा रहा है। इनमें पहला चरण अक्षरधाम (दिल्ली) से ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे तक, दूसरा चरण ईस्टर्न पेरिफेरल से सहारनपुर बाईपास, तीसरा सहारनपुर बाईपास से गणेशपुर, और चौथा और अंतिम चरण गणेशपुर से आशारोड़ी (देहरादून बॉर्डर) तक है। अधिकारियों के अनुसार, सभी चरणों का काम लगभग पूरा हो चुका है और अब केवल अंतिम स्तर के छोटे-छोटे कार्य तेजी से पूरे किए जा रहे हैं। यह एक्सप्रेसवे भारत की तीसरे सबसे बड़े एलिवेटेड रोड के रूप में भी दर्ज होने जा रहा है।
पूरी तरह खुलने के बाद मात्र तीन घंटे का रह जाएगा सफर (सांकेतिक तस्वीर)
12 किलोमीटर के सेक्शन की सभी लेन खुली
नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) ने बारिश और बाढ़ की स्थिति को ध्यान में रखते हुए एक्सप्रेसवे में एक 12 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड सेक्शन बनाया है। यह हिस्सा डाटकाली से गणेशपुर तक फैला हुआ है। बरसाती नदी के ऊपर बने 12 किमी लंबे एलिवेटेड सेक्शन पर अब छह लेन में ट्रैफिक चल रहा है, जबकि बरसात में पहले तीन लेन खोली गई थी। साथ ही, पूरी सड़क पर निरंतर मोबाइल नेटवर्क कनेक्टिविटी सुनिश्चित की गई है ताकि यात्रियों को सफर के दौरान किसी भी प्रकार की बाधा का सामना न करना पड़े।
कब खुलेगा देहरादून-दिल्ली एक्सप्रेसवे
खबरों के मुताबिक, NHAI का लक्ष्य है कि दिसंबर 2025 तक पूरा देहरादून-दिल्ली एक्सप्रेसवे यातायात के लिए खोल दिया जाए। इस परियोजना के पूरी तरह चालू हो जाने से दिल्ली से देहरादून का सफर मात्र तीन घंटे में पूरा किया जा सकेगा, जो फिलहाल पांच से छह घंटे लगता है। एक्सप्रेसवे के पूरी तरह शुरू होने से ट्रैफिक जाम में राहत, ईंधन की बचत और सड़क सुरक्षा में सुधार जैसे कई लाभ मिलेंगे।
आधुनिक तकनीक और पर्यावरण संतुलन का उदाहरण
यह एक्सप्रेसवे न सिर्फ तेज और सुविधाजनक यात्रा प्रदान करेगा, बल्कि पर्यावरण-अनुकूल निर्माण का भी प्रतीक है। इसमें वाइल्डलाइफ कॉरिडोर, ग्रीन बेल्टऔर एलिवेटेड स्ट्रक्चर जैसी सुविधाएं शामिल हैं, जिससे आसपास के पर्यावरण पर न्यूनतम प्रभाव पड़े। सुरक्षा, सिग्नलिंग, लाइटिंग और चौड़ी लेन जैसी आधुनिक तकनीकों से लैस यह एक्सप्रेसवे देश की सड़क इन्फ्रास्ट्रक्चर में एक नई ऊंचाई का प्रतीक बनेगा।
