सरकार द्वारा नए लेबर कोड्स की घोषणा के बाद प्राइवेट सेक्टर में काम करने वाले लाखों कर्मचारियों को उम्मीद जगी थी कि अब उन्हें जल्दी और बेहतर सोशल सिक्योरिटी मिलेगी। खासतौर पर फिक्स्ड टर्म यानी तय अवधि पर काम करने वाले कर्मचारियों के लिए यह एक बड़ी राहत मानी जा रही थी, क्योंकि नए नियमों के मुताबिक सिर्फ एक साल की नौकरी के बाद ही ग्रेच्युटी मिलने की बात कही गई थी। लेकिन हकीकत यह है कि 2025 के अंत तक भी ज्यादातर कर्मचारियों को इस नियम का कोई फायदा नहीं मिला। सवाल उठता है कि जब नियम बन चुका है, तो फिर 1 साल में ग्रेच्युटी क्यों नहीं मिल रही?
क्या था ग्रैच्युटी का नियम?
ग्रेच्युटी से जुड़ा पुराना नियम Payment of Gratuity Act, 1972 के तहत आता था। इसके मुताबिक किसी भी कर्मचारी को ग्रेच्युटी पाने के लिए लगातार 5 साल तक एक ही कंपनी में काम करना जरूरी था। यह नियम स्थायी कर्मचारियों के लिए तो ठीक था, लेकिन फिक्स्ड टर्म और कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों के लिए बड़ी समस्या बन गया। आज के जॉब मार्केट में जहां लोग जल्दी-जल्दी नौकरी बदलते हैं, वहां 5 साल पूरे कर पाना बहुत मुश्किल हो जाता है।नए लेबर कोड में क्या हुआ बदलाव?
नए लेबर कोड्स, खासतौर पर Code on Social Security, 2020 में सरकार ने बड़ा बदलाव करते हुए यह प्रावधान जोड़ा कि फिक्स्ड टर्म कर्मचारी को अगर वह 1 साल की सेवा पूरी करता है, तो उसे ग्रेच्युटी मिलनी चाहिए। सरकार का तर्क था कि अब काम करने का तरीका बदल चुका है और सोशल सिक्योरिटी के फायदे कर्मचारियों को जल्दी मिलने चाहिए।नया नियम अबतक क्यों नहीं हुआ लागू?
असल समस्या यहीं से शुरू होती है। भारत में लेबर कानून कॉनकरेंट लिस्ट में आते हैं। इसका मतलब यह है कि केंद्र सरकार कानून बना सकती है, लेकिन उसे लागू करने के लिए राज्य सरकारों को अपने नियम (Rules) नोटिफाई करने होते हैं। जब तक राज्य सरकारें नए लेबर कोड्स के तहत नियम जारी नहीं करतीं, तब तक कंपनियों पर इन्हें लागू करना अनिवार्य नहीं होता।राज्य सरकारों की तरफ से स्पष्ट दिशा-निर्देश न आने की वजह से ज्यादातर कंपनियां अब भी पुराने ग्रेच्युटी नियमों को ही फॉलो कर रही हैं। कंपनियों को डर है कि अगर वे अपने स्तर पर 1 साल वाली ग्रेच्युटी लागू करती हैं, तो बाद में ऑडिट, कानूनी जांच या पिछली तारीख से भुगतान जैसी परेशानियां खड़ी हो सकती हैं। इसी कारण वे सुरक्षित रास्ता अपनाते हुए 5 साल वाले नियम पर ही टिके रहना बेहतर समझ रही हैं।
क्या है सरकार का कहना?
केंद्र सरकार और श्रम मंत्रालय कई बार यह साफ कर चुके हैं कि नए लेबर कोड्स के तहत फिक्स्ड टर्म कर्मचारियों को 1 साल बाद ग्रेच्युटी मिलनी चाहिए। लेकिन मंत्रालय यह भी स्वीकार करता है कि जब तक राज्य सरकारें अपने नियम अंतिम रूप नहीं देतीं, तब तक यह प्रावधान सिर्फ कागजों में ही रहेगा।सिर्फ ग्रेच्युटी नहीं, ये फायदे भी अटके
ग्रेच्युटी के अलावा नए लेबर कोड्स से जुड़े कई और अहम बदलाव भी अटके हुए हैं। इनमें सैलरी स्ट्रक्चर में बदलाव, गिग वर्कर्स के लिए सोशल सिक्योरिटी, काम के घंटे, ओवरटाइम और छंटनी से जुड़े नियम शामिल हैं। इन सभी सुधारों का फायदा भी तभी मिलेगा, जब राज्य सरकारें अपने स्तर पर नियम लागू करेंगी।
फिलहाल स्थिति यह है कि जब तक सभी राज्य सरकारें नए लेबर कोड्स के तहत नियम नोटिफाई नहीं करतीं, तब तक 1 साल में ग्रेच्युटी मिलना मुश्किल है। यानी नया नियम होने के बावजूद कर्मचारियों को अभी भी 5 साल वाले पुराने सिस्टम पर ही निर्भर रहना पड़ेगा।
