Year Ender 2025: 2024‑25 (FY25) में भारत ने कुल करीब 81.04 अरब अमेरिकी डॉलर का विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) प्राप्त किया। यह पिछले साल की तुलना में लगभग 14% अधिक है। इससे यह स्पष्ट होता है कि वैश्विक निवेशक भारत की अर्थव्यवस्था और नीतियों, जैसे इज ऑफ डूइंग बिजनेस, पर भरोसा बनाए हुए हैं।
भारत ने 2024‑25 में रिकॉर्ड FDI आकर्षित किया (तस्वीर-istock)
सबसे अधिक निवेश
FY25 में सबसे ज्यादा निवेश सर्विस सेक्टर में गया, जिसे कुल FDI का 19% मिला। पिछले साल यह निवेश करीब 6.64 अरब डॉलर था, जो अब बढ़कर 9.35 अरब डॉलर हो गया। इस सेक्टर में वित्तीय सेवाएं (बैंकिंग, इंश्योरेंस), बिजनेस सर्विसेज, कंसल्टेंसी, BPO और IT‑सेवाएं शामिल हैं। भारत में डिजिटलाइजेशन और आउटसोर्सिंग के बढ़ते अवसरों के कारण यह सेक्टर विदेशी निवेशकों की पहली पसंद बना हुआ है।
दूसरे बड़े सेक्टर
सर्विस सेक्टर के बाद कंप्यूटर सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर सेक्टर में FY25 में लगभग 16% FDI गया। तीसरे स्थान पर रहा ट्रेडिंग (व्यापार) सेक्टर, जिसे करीब 8% निवेश मिला। ये निवेश संकेत देते हैं कि विदेशी कंपनियां भारत के टेक्नोलॉजी, डिजिटल सर्विसेज और बड़े कंज्यूमर मार्केट में अवसर देख रही हैं।
मैन्युफैक्चरिंग में भी बढ़त
FY25 में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में निवेश भी बढ़कर 19.04 अरब डॉलर हो गया, यानी 18% की वृद्धि। हालांकि कुल निवेश में इसका हिस्सा सर्विस और टेक सेक्टर जितना बड़ा नहीं है। यह दर्शाता है कि भारत में मेक इन इंडिया और PLI जैसे प्रोत्साहन धीरे‑धीरे असर दिखा रहे हैं।
क्या संकेत मिलते हैं?
- भारत धीरे‑धीरे दुनिया के लिए मैन्युफैक्चरिंग हब बनने की दिशा में है।
- वैश्विक निवेशक भारत को डिजिटल, आउटसोर्सिंग, कंसल्टिंग और रिटेल के लिए भरोसेमंद मान रहे हैं।
- मैन्युफैक्चरिंग में निवेश की बढ़त यह दिखाती है कि सरकार की उत्पादन‑संबंधी नीतियां काम कर रही हैं।
भविष्य की संभावनाएं
अगर सरकार नीतिगत स्थिरता, इंफ्रास्ट्रक्चर सुधार और निवेश‑अनुकूल नीतियां जारी रखती है, तो आने वाले समय में मैन्युफैक्चरिंग के साथ‑साथ सर्विस, टेक और ट्रेडिंग सेक्टर में भी FDI बढ़ने की संभावना है। भारत न सिर्फ परंपरागत निर्माण अर्थव्यवस्था, बल्कि एक आधुनिक, डिजिटल और सर्विस‑ओरिएंटेड अर्थव्यवस्था के रूप में भी खुद को स्थापित कर रहा है।
