Year-Ender 2025: वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच निवेश के सुरक्षित विकल्प और चुनिंदा उद्योगों में मांग बढ़ने से इस साल चांदी ने रिटर्न के मामले में परंपरागत निवेश विकल्प सोने और शेयर बाजार को भी पीछे छोड़ दिया है। स्थिति यह हो गई है कि इस साल अबतक सोने ने जहां करीब 70 प्रतिशत रिटर्न दिया है वहां चांदी 137 प्रतिशत से भी अधिक चढ़ी है। विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व के नीतिगत दर में आगे और कटौती की उम्मीदों के बीच चांदी में अगले साल भी 15 से 20 प्रतिशत तक की तेजी बने रहने की उम्मीद है।
सोना और चांदी
अखिल भारतीय सर्राफा संघ के अनुसार, दिल्ली में चांदी की कीमत सोमवार को 10,400 रुपये प्रति किलोग्राम बढ़कर 2,14,500 रुपये प्रति किलोग्राम (सभी करों सहित) के अबतक के उच्चस्तर पर पहुंच गईं। चांदी की कीमत इस साल एक जनवरी को 90,500 रुपये प्रति किलोग्राम थी। इस तरह चांदी में 1,24,000 रुपये यानी 137 प्रतिशत की वृद्धि हो चुकी है।
क्यों चांदी में इतनी बड़ी तेजी?
मेहता इक्विटीज लि. के उपाध्यक्ष (जिंस) राहुल कलंत्री ने कहा कि चांदी की कीमतों में उछाल सट्टेबाजी का नहीं बल्कि सट्रक्चरल कारणों से हे। सप्लाई में लगातार कमी के साथ औद्योगिक मांग बढ़ रही है। कृत्रिम मेधा (एआई), ईवी तथा स्वच्छ ऊर्जा जैसे नए क्षेत्रों में बढ़ती मांग कीमत में वृद्धि का प्रमुख कारण है। उन्होंने कहा कि मजबूत औद्योगिक मांग के अलावा, ईटीएफ (एक्सचेंज ट्रेडेड फंड) में निरंतर निवेश, भौतिक रूप से खरीद अधिक होने और निवेशकों के जिंस में निवेश बढ़ाने से भी कीमतों को समर्थन मिला है। एक और संकेत सोने-चांदी की कीमतों के अनुपात में तीव्र गिरावट है, जो जोखिम लेने की बढ़ती प्रवृत्ति को बताती है।
सोने और चांदी के अनुपात में तीव्र गिरावट का मतलब है कि चांदी की कीमत सोने की कीमतों से अधिक तेजी से बढ़ रही हैं। यह संकेत देता है कि सोने के मुकाबले चांदी के मूल्य में वृद्धि हो रही है और यह निवेश का बेहतर अवसर प्रदान करती है।
शेयर बाजार काफी पीछे छूटा
अगर रिटर्न की बात की जाए तो इस साल सोना ने 19 दिसंबर तक लगभग 72 प्रतिशत का रिटर्न दिया है जबकि इक्विटी बाजार के मामले में निफ्टी 50 और निफ्टी 500 सूचकांक ने क्रमशः 7.0 प्रतिशत और 5.1 प्रतिशत का रिटर्न दिया। वहीं चांदी ने 137 प्रतिशत का सबसे अधिक रिटर्न दिया है।
चांदी की चमक बनी रहने का अनुमान
विशेषज्ञों के मुताबिक, आर्थिक गतिविधियों और महंगाई बनी रहने के साथ सौर उपकरणों एवं इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) जैसे उद्योगों में मांग बढ़ने की संभावना ने चांदी की चमक अगले साल भी बनी रह सकती है और यह सोने की तरह सुरक्षित निवेश विकल्प बनती दिख रही है।
अगले साल चांदी की स्थिति के बारे में पूछे जाने पर कलंत्री ने कहा, ‘‘मजबूत औद्योगिक मांग, सीमित आपूर्ति और अनुकूल तकनीकी रुझानों के कारण चांदी का दीर्घकालिक दृष्टिकोण सकारात्मक बना हुआ है। हालांकि, 2026 के लिए 15 से 20 प्रतिशत वृद्धि का लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि हालांकि, निवेशकों को अस्थिरता और बीच-बीच में होने वाले सुधारों के लिए तैयार रहना चाहिए। किसी भी निवेश संबंधी निर्णय लेने से पहले एक अनुशासित, चरणबद्ध निवेश दृष्टिकोण और पेशेवर वित्तीय सलाह अत्यंत आवश्यक है।
उन्होंने कहा, ‘‘कीमती धातुओं में निवेश 2026 में भी जारी रखना चाहिए लेकिन यह निवेश कीमतों में पांच से आठ प्रतिशत की गिरावट आने पर चरणबद्ध ढंग से ही करना चाहिए। कुल मिलाकर, 2026 की पहली छमाही में मौजूदा स्तरों से 20 से 25 प्रतिशत तक का अतिरिक्त रिटर्न मिलने की उम्मीद की जा सकती है।’’
