World Largest Gold Bar : दुनियाभर में हर दिन अनोखे और हैरान कर देने वाले कारनामे होते रहते हैं, जिन्हें इतिहास के पन्नों और 'गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स' में दर्ज किया जाता है। ऐसा ही एक अद्भूत रिकॉर्ड कंगारू देश ऑस्ट्रेलिया के नाम दर्ज हुआ है, जिसने दुनिया की सबसे बड़ी और भारी सोने की ईंट (गोल्ड बार) बनाकर तहलका मचा दिया है। वेस्टर्न ऑस्ट्रेलिया स्थित पर्थ मिंट द्वारा ढाली गई इस सोने की ईंट का वजन आधे टन से भी ज्यादा है। इसे आधिकारिक तौर पर दुनिया की सबसे विशाल और बहुमूल्य सोने की ईंट के रूप में मान्यता मिली है।
ऑस्ट्रेलिया ने बना डाली 521.2 किलो वजन की दुनिया की सबसे बड़ी गोल्ड बार (तस्वीर- x/BRICSANDG20)
शुद्धता का नया पैमाना और करोड़ों में कीमत
पर्थ मिंट द्वारा बनाई गई इस विशालकाय गोल्ड बार की कुल माप और शुद्धता देखकर हर कोई हैरान है। 24 कैरेट के शुद्ध सोने से तैयार की गई इस ईंट का कुल वजन करीब 521.2 किलोग्राम है। आम तौर पर बाजार में मिलने वाला शुद्ध सोना 99.99 प्रतिशत (फोर-नाइन्स) शुद्धता का होता है, लेकिन इस खास ईंट को 99.999 प्रतिशत (फाइव-नाइन्स) की रिकॉर्ड शुद्धता के साथ बनाया गया है। भारतीय रुपये में इस आधे टन से भी भारी सोने की ईंट की अनुमानित कीमत करीब 687 करोड़ रुपये आंकी गई है।
दुबई का रिकॉर्ड टूटा, 'पीपल्स बार' पड़ा नाम
इस असाधारण उपलब्धि के साथ ऑस्ट्रेलिया ने दो साल पहले दुबई की एक मिंट द्वारा बनाए गए 300 किलोग्राम सोने की ईंट के पिछले विश्व रिकॉर्ड को ध्वस्त कर दिया है। पर्थ मिंट ने अपनी इस ऐतिहासिक और कलात्मक कृति को "पीपल्स बार" का नाम दिया है। पर्थ मिंट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) पॉल ग्राहम के अनुसार, 'फाइव-नाइन्स' यानी 99.999% शुद्धता का सोना ढालना कोई आसान काम नहीं है। इस प्रोजेक्ट की परिकल्पना एक साल पहले की गई थी और मुख्य ईंट को ढालने से पहले मिंट के कारीगरों ने बाकायदा एक 'प्रैक्टिस रन' भी पूरा किया था ताकि कोई त्रुटि न रह जाए।
35 से अधिक एक्सपर्ट्स की मेहनत और एडवांस्ड तकनीक
इस विशाल गोल्ड बार को ढालना केवल सोने को पिघलाने का काम नहीं था, बल्कि यह इंजीनियरिंग और विज्ञान की एक बड़ी कसौटी थी। इसे तैयार करने में 35 से भी अधिक धातुकर्मियों, वैज्ञानिकों और एक्सपर्ट्स की टीम दिन-रात लगी हुई थी। मिंट के अत्याधुनिक 'फ्लेमलेस कास्टिंग चैंबर' तकनीक का उपयोग करके सोने को पहले करीब 1,400°C के अत्यधिक तापमान पर पिघलाया गया। इसके बाद बेहद सावधानी के साथ इसे एक विशाल सांचे में ढाला गया और कई घंटों तक एक नियंत्रित वातावरण में धीरे-धीरे ठंडा होने दिया गया। बारीक नियोजन और उच्च तकनीकी सटीकता के कारण ही इतनी बड़ी मात्रा में सोने की गुणवत्ता और शुद्धता को बरकरार रखा जा सका। ऑस्ट्रेलिया का यह कारनामा अब दुनिया भर के ज्वैलर्स, निवेशकों और आम लोगों के बीच उत्सुकता का केंद्र बना हुआ है।
