अगर महिलाएं लॉन्गटर्म निवेश करें तो 10 साल में GDP में 40 लाख करोड़ रुपये बढ़ेगा योगदान!

Women Financial Participation: महिलाओं की लॉन्ग टर्म वित्तीय निवेश में बढ़ती भागीदारी अगले 10 वर्षों में भारत के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) पर करीब 40 लाख करोड़ रुपये (430 अरब अमेरिकी डॉलर) के बराबर प्रभाव डाल सकती है। महिलाओं की अप्रयुक्त बचत को उत्पादक और विकास उन्मुख क्षेत्रों में लगाने से अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण वृद्धि संभव है।

Women Financial Participation: महिलाओं की लॉन्ग टर्म वित्तीय निवेश में बढ़ती भागीदारी से भारत की अर्थव्यवस्था पर बड़ा असर पड़ सकता है। एक नई रिपोर्ट के अनुसार, अगले 10 वर्षों में यह योगदान लगभग 40 लाख करोड़ रुपये, यानी 430 अरब अमेरिकी डॉलर के बराबर हो सकता है। यह प्रभाव महिलाओं की बचत को उत्पादक और वृद्धि उन्मुख क्षेत्रों में निवेश करने से उत्पन्न होगा। न्यूज एजेंसी पीटीआई-भाषा के मुताबिक लैक्समी और ईवाई की रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर महिलाएं अपने वित्तीय संसाधनों का लॉन्ग टर्म निवेश करें, तो इससे केवल पूंजी निर्माण ही नहीं होगा, बल्कि उस पूंजी से उत्पन्न आर्थिक उत्पादन में भी वृद्धि होगी। रिपोर्ट के अनुसार, महिलाओं के निवेश में वृद्धि से भारत के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में 10 साल की अवधि में महत्वपूर्ण संचयी प्रभाव देखने को मिलेगा।

Women Financial Participation

वित्तीय निवेश में महिलाओं का बढ़ता योगदान (तस्वीर-istock)

वित्तीय समावेशन में प्रगति, लेकिन चुनौती अभी बाकी

हालांकि वित्तीय समावेशन के क्षेत्र में भारत ने अच्छी प्रगति की है, लेकिन रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि महिलाओं की वास्तविक भागीदारी और उनकी वित्तीय क्षमता के बीच अभी भी बड़ा अंतर है। लैक्समी और ईवाई के महिला वित्तीय समृद्धि सूचकांक के अनुसार, भारत में महिलाओं के लिए स्थायी संपत्ति तक पहुंच का रास्ता दो-तिहाई से अधिक हिस्सों में संरचनात्मक रूप से अवरुद्ध है।

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