8th Pay Commission: कर्मचारी यूनियनों और 8वें वेतन आयोग के बीच पहली औपचारिक बातचीत खत्म हो गई है, लेकिन कर्मचारियों की तरफ से 3.83x के फिटमेंट फैक्टर पर कम से कम 69,000 रुपये की सैलरी की मांग की गई है। कर्मचारी संगठनों के साथ चर्चाओं का मुख्य केंद्र वार्षिक वेतन वृद्धि के स्तर, पदोन्नति की अवधि और राष्ट्रीय पेंशन योजना (NPS) को वापस लेने जैसी मांगें रहीं।
8वां वेतन आयोग
अभी न्यूनतम सैलरी 18,000 रुपये
अभी, कर्मचारियों को 7वें वेतन आयोग के तहत हर महीने कम से कम 18,000 रुपये की बेसिक सैलरी मिलती है, जिसे 6वें वेतन आयोग के 7,000 रुपये से बढ़ाया गया था। नई दिल्ली में 28 से 30 अप्रैल तक हुई बैठक में, राष्ट्रीय परिषद (संयुक्त परामर्श तंत्र) के कर्मचारी पक्ष ने लगभग 36 लाख केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए वेतन में बढ़ोतरी, वेतन ढांचे में बदलाव और ज्यादा पेंशन व भत्तों की मांग की।
बैठक के दौरान क्या मांगें की गईं?
रिपोर्ट के अनुसार, कर्मचारियों के प्रतिनिधियों की मुख्य मांग यह है कि जीवन-यापन के खर्चों के हिसाब से न्यूनतम वेतन को ₹18,000 से बढ़ाकर ₹69,000 किया जाए। रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि वेतन और पेंशन के पैमाने में मांगी गई इन संशोधनों को दर्शाने के लिए 3.83 गुना के 'फिटमेंट फैक्टर' की आवश्यकता होगी।
रिपोर्ट के अनुसार, एक और मुख्य मांग यह है कि काम में ठहराव (stagnation) को दूर करने के लिए हर पांच साल में तेजी से प्रमोशन दिए जाएं (साथ ही करियर में प्रगति को इनाम देने के लिए स्टाफ की तरफ से दो अतिरिक्त प्रमोशन भी)। इसके अलावा, उन्होंने यह भी मांग की है कि सालाना वेतन वृद्धि (increment) को मूल वेतन के 3% से बढ़ाकर 6% कर दिया जाए।
मांगों की सूची में सभी भत्तों — खासकर बच्चों की शिक्षा भत्ता (CEA), मकान किराया भत्ता (HRA), और जोखिम भत्ता — को तीन गुना बढ़ाने की भी मांग की गई है।
कर्मचारी संगठन चाहते हैं कि भत्तों को महंगाई भत्ते (DA) से जोड़ा जाए, और ब्याज-मुक्त अग्रिम (advances), तथा त्योहारों और वाहनों के लिए ऋण जैसी सुविधाएं भी दी जाएं।
छुट्टियों के मामले में, प्रतिनिधियों ने 600 दिनों तक की छुट्टियों को नकदी में बदलने (encashment) की मांग की है। साथ ही मासिक धर्म अवकाश (menstrual leave), माता-पिता की देखभाल के लिए अवकाश और पितृत्व अवकाश जैसी नई सुविधाएं जोड़ने की भी मांग की है।
पेंशन के लिए, स्टाफ ने मांग की है कि NPS को खत्म कर दिया जाए और पुरानी, गैर-अंशदायी एकीकृत पेंशन योजना (UPS) को फिर से लागू किया जाए। इसके पीछे तर्क यह है कि स्टाफ ने पहले पेंशन का विकल्प चुनने के लिए भविष्य निधि (provident fund) के लाभों को छोड़ दिया था।
सेवानिवृत्त कर्मचारियों की ओर से भी एक मांग की गई है, जिसमें नागरिक कर्मचारियों के लिए 'वन रैंक वन पेंशन' (OROP) लागू करने पर चिंता जताई गई है। रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि उन्होंने पेंशन में समय-समय पर संशोधन करने, 11 साल बाद कम्यूटेड पेंशन (pension commutation) को बहाल करने और अधिक बैठकें आयोजित करने की मांग की है।
चर्चा प्रक्रिया के संबंध में भी यह मांग की गई है कि पैनल की अंतिम सिफारिशें आने से पहले, काम करने की स्थितियों को बेहतर ढंग से समझने के लिए अधिक बैठकें आयोजित की जाएं और दूरदराज के इलाकों का दौरा किया जाए।
गौरतलब है कि 8वें CPC ने पिछले सप्ताह एक बयान में यह भी कहा था कि वह आने वाले महीनों में "उचित समय पर" राष्ट्रीय राजधानी और अन्य राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों में और अधिक बैठकें आयोजित करेगा।
