क्या शादी के बाद सरनेम बदलने से नहीं मिलेगा बीमा क्लेम? जानें दिल्ली कोर्ट ने क्या कहा

शादी के बाद सरनेम बदलना बीमा क्लेम रुकने की वजह नहीं बन सकता। दिल्ली उपभोक्ता फोरम ने नाम में अंतर का हवाला देकर लाखों की मैच्योरिटी राशि रोकने वाली इंश्योरेंस कंपनी को कड़ी फटकार लगाते हुए ब्याज और भारी हर्जाने समेत भुगतान का आदेश दिया है।

यह पूरा मामला दिल्ली के यमुना विहार की रहने वाली प्रीति विंडलेश नाम की एक महिला से जुड़ा हुआ है। प्रीति ने 24 दिसंबर 2012 को 'आईएनजी वैश्य लाइफ इंश्योरेंस' (ING Vysya Life) से एक जीवन बीमा पॉलिसी खरीदी थी। समय के साथ यह कंपनी पहले एक्साइड लाइफ और बाद में एचडीएफसी लाइफ इंश्योरेंस (HDFC Life Insurance) कंपनी लिमिटेड में मर्ज (विलय) हो गई। दिसंबर 2023 में जब इस पॉलिसी की मैच्योरिटी (Maturity) का समय पूरा हुआ, तो कंपनी ने उनके नाम पर 5,12,069 रुपये का एक चेक जारी किया। लेकिन पेंच यहां फंसा कि यह चेक महिला के पुराने नाम 'प्रीति' पर जारी किया गया था, जबकि शादी के बाद उन्होंने अपने सभी कानूनी दस्तावेजों और बैंक खाते में नाम अपडेट करवाकर 'प्रीति विंडलेश' कर लिया था।

Surname Change

जब महिला ने इस चेक को अपने कोटक महिंद्रा बैंक (Kotak Mahindra Bank) में जमा किया, तो बैंक ने साफ कह दिया कि चेक पर लिखा नाम और बैंक खाते का नाम आपस में मैच नहीं कर रहा है (Name Mismatch), इसलिए पैसा ट्रांसफर नहीं हो सकता। इसके बाद जब महिला ने बीमा कंपनी से नया चेक जारी करने का अनुरोध किया, तो कंपनी ने तकनीकी नियमों का हवाला देकर और नाम में अंतर की बात कहकर उनके लाखों रुपये की मैच्योरिटी राशि को रोक दिया। कंपनी के इस ढुलमुल और गैर-जिम्मेदाराना रवैये से परेशान होकर महिला ने उत्तर-पूर्वी जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (Consumer Forum) का दरवाजा खटखटाया।

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