आज के समय में क्रेडिट कार्ड (Credit Card) का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। खरीदारी से लेकर बिल भुगतान तक, लोग हर छोटी-बड़ी जरूरत के लिए क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल कर रहे हैं। लेकिन कई कार्डधारकों की एक आदत उन्हें धीरे-धीरे कर्ज के जाल में फंसा सकती है। यह आदत है हर महीने केवल मिनिमम ड्यू का भुगतान करना है। पहली नजर में यह विकल्प राहत देने वाला लग सकता है, लेकिन लंबे समय में यह आपकी वित्तीय स्थिति को नुकसान पहुंचा सकता है आइए जानते हैं कैसे-
क्रेडिट कार्ड मिनिमम ड्यू (AI Generated Image)
मिनिमम अमाउंट ड्यू क्या है
क्रेडिट कार्ड के बिल में दो रकम दिखाई जाती हैं पहली Total Amount Due और दूसरी Minimum Amount Due। मिनिमम ड्यू वह न्यूनतम राशि होती है, जिसे भुगतान करने पर आपका कार्ड अकाउंट एक्टिव बना रहता है और लेट पेमेंट शुल्क से बचा जा सकता है। आमतौर पर यह कुल बकाया राशि का लगभग 5% से 10% होता है।
ब्याज का बोझ कैसे बढ़ता है
लेकिन जब केवल मिनिमम ड्यू का भुगतान किया जाता है तो बाकी बची हुई राशि अगले बिलिंग साइकल में आगे बढ़ जाती है। इस बकाया रकम पर बैंक ब्याज लगाना शुरू कर देता है। यानी आपने लेट फीस तो बचा ली, लेकिन ब्याज का बोझ अपने ऊपर ले लिया। मिनिमम ड्यू भरने से अकाउंट अच्छी स्थिति में बना रहता है, लेकिन शेष राशि पर ब्याज लगता रहता है।
इसका सबसे बड़ा नुकसान यह है कि क्रेडिट कार्ड पर लगने वाला ब्याज आमतौर पर काफी अधिक होता है। अगर लगातार कई महीनों तक केवल मिनिमम ड्यू ही भरते रहें तो मूल बकाया राशि कम होने के बजाय ब्याज के कारण बढ़ती जा सकती है। इससे कर्ज लंबे समय तक बना रह सकता है और कुल भुगतान भी काफी बढ़ जाता है।
अकाउंट डिफॉल्ट की कैटेगरी में जाने से कैसे बचाएं
हालांकि मिनिमम ड्यू का भुगतान, भुगतान न करने की तुलना में बेहतर माना जाता है, क्योंकि इससे लेट फीस और क्रेडिट स्कोर पर नकारात्मक असर से बचा जा सकता है। समय पर कम से कम मिनिमम ड्यू भरने से अकाउंट डिफॉल्ट की कैटेगरी में नहीं जाता और क्रेडिट हिस्ट्री सुरक्षित रहती है।
कर्ज के जाल में फंसने से कैसे बचें
लेकिन फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स यही सलाह देते हैं कि Total Amount Due का भुगतान करें। इससे ब्याज नहीं देना पड़ता और आप कर्ज के चक्र में फंसने से बच जाते हैं। हालांकि, अघर किसी महीने पूरा बिल चुकाना संभव न हो तो कोशिश रहनी चाहिए कि Minimum Due से अधिक राशि जमा की जाए ताकि बकाया जल्दी कम हो सके। साथ ही खर्चों पर भी नजर रखी जाना चाहिए, ऑटो-पेमेंट या रिमाइंडर का इस्तेमाल किया जाना चाहिए । क्रेडिट कार्ड को अतिरिक्त खर्च का साधन नहीं बल्कि जिम्मेदारी से इस्तेमाल किए जाने वाला वित्तीय उपकरण माना जाना चाहिए।
