आम आदमी की कमाई क्यों कम पड़ रही? महंगाई, कर्ज का बोझ और ठहरी सैलरी की पूरी दास्तां

ईरान युद्ध से कच्चे तेल की कीमत में आग लगी है। इसका असर भारत पर हुआ है। यहां पेट्रोल, डीजल से लेकर CNG महंगी हो गई है, जिससे ट्रांसपोर्टेशन महंगा हुआ है। इससे सभी चीजों पर महंगाई बढ़ी है।

‘सखी सैंया तो खूब ही कमात हैं, महंगाई डायन खाए जात है’ - 2010 में आई पीपली लाइव फिल्म का यह गाना इन दिनों फिर मौजू हो गया है। ईरान संकट के चलते पेट्रोल, डीजल, CNG समेत जरूरी खाने-पीने के सामान तेजी से महंगे हुए हैं। इससे आम आदमी पर बोझ बढ़ा है। पहले से ही हर साल स्कूल फीस में बेतहाशा बढ़ोतरी, इलाज का बढ़ता खर्च, और रेंट से लेकर होम-कार लोन की भारी-भरकम EMI के दलदल में फंसा आम आदमी अब बढ़ती महंगाई को सहन नहीं कर पा रहा है। उसे समझ में नहीं आ रहा कि तनख्वाह तो आती है, लेकिन जाती कहां है? आज हर कोई एक ही सवाल पूछ रहा है कि कर्ज चुकाने से लेकर बच्चों की फीस तक, क्या अब जिंदगी सिर्फ बिल भरने के लिए रह गई है? आइए समझते हैं कि महंगाई से कैसे घुट रहा है आम आदमी का दम।

Middle Class Struggle

महंगाई की मार

रेंट से लेकर EMI का बोझ सहना मुश्किल

नोएडा एक्सटेंशन में रहने वाले मुकेश कुमार झा कहते हैं कि इस महंगाई में अब रहना मुश्किल हो रहा है। वे बताते हैं कि आज से तीन साल पहले यहां पर 2बीएचक फ्लैट की कीमत 35 से 40 लाख रुपये थी। अगर कोई पैसे बचाकर फ्लैट खरीदता थो तो उसकी ईएमआई 25 से 30 हजार रुपये मंथली आती थी। आज उसी फ्लैट की कीमत 1 करोड़ के करीब पहुंच गई है। यानी अगर कोई नौकरीपेशा हिम्मत कर फ्लैट खरीदें भी तो उसे 70 से 80 हजार रुपये मंथली ईएमआई अगले 20 साल तक चुकानी होगी। इस दौरान नौकरी रहेगी या नहीं, यह अलग संकट। फ्लैट की कीमत आसमान पर पहुंचने से रेंटल में भी बढ़ोतरी हुई है। जिस फ्लैट का रेंट 15 हजार रुपये प्रति महीना था वो आज के समय में 25 हजार रुपये हो गया है।

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