आम तौर पर जब भी दुनिया के किन्हीं दो देशों के बीच युद्ध छिड़ता है या भू-राजनीतिक तनाव (Geopolitical Tension) बढ़ता है, तो सोने और चांदी की कीमतों में आग लग जाती है। निवेशक शेयर बाजार से अपना पैसा निकालकर सोने में लगाना सुरक्षित समझते हैं क्योंकि इसे 'सेफ हेवन' (Safe Haven) माना जाता है। लेकिन मौजूदा समय में ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव और युद्ध की आहट के बावजूद, सर्राफा बाजार (Bullion Market) से चौंकाने वाली खबरें आ रही हैं। अंतरराष्ट्रीय और भारतीय बाजारों में सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट देखी जा रही है।
28 फरवरी को जब अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच लड़ाई शुरू हुई उसके बाद से सोने की कीमत में बड़ी तेजी नहीं देखने को मिली है। सोना-चांदी दोनों सस्ते हो गए हैं. बीते एक हफ्ते में सोने की कीमत में 5000 रुपये से अधिक की गिरावट आई है। जबकि चांदी के भाव भी 12000 से ज्यादा गिर गए हैं। जंग के बीच सोना-चांदी के भाव बढ़ने के बजाए गिरते जा रहे हैं, जो कीमती धातुओं का अलग ही रंग दिखा रहे हैं। आखिर युद्ध के इस माहौल में भी सोना सस्ता क्यों हो रहा है?
मुनाफावसूली का बड़ा असर
सोने की कीमतों में हालिया गिरावट की सबसे प्रमुख वजह 'मुनाफावसूली' यानी प्रॉफिट बुकिंग है। पिछले कुछ महीनों में सोने और चांदी की कीमतों ने लगातार नए रिकॉर्ड बनाए हैं और अपने उच्चतम स्तर (All-time High) को छुआ है। जब कीमतें बहुत ज्यादा बढ़ जाती हैं, तो बड़े निवेशक और ट्रेडर्स अपना मुनाफा भुनाने के लिए सोना बेचना शुरू कर देते हैं। इस बिकवाली के दबाव के कारण बाजार में सोने की सप्लाई बढ़ जाती है और कीमतें नीचे आने लगती हैं। मौजूदा युद्ध की स्थिति में भी निवेशकों को लग रहा है कि कीमतों में जो बढ़त होनी थी वह पहले ही हो चुकी है, इसलिए वे अब अपना पैसा सुरक्षित कर रहे हैं।
अमेरिकी डॉलर की मजबूती और बॉन्ड यील्ड
सोने की कीमतों का अमेरिकी डॉलर के साथ सीधा लेकिन उल्टा संबंध होता है। जब डॉलर मजबूत होता है, तो सोना सस्ता होने लगता है। वर्तमान में अमेरिकी अर्थव्यवस्था के मजबूत आंकड़ों और फेडरल रिजर्व (US Fed) द्वारा ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदें कम होने से डॉलर इंडेक्स में मजबूती आई है। इसके साथ ही अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड (Bond Yield) में भी बढ़ोतरी हुई है। जब बॉन्ड पर मिलने वाला ब्याज बढ़ता है, तो निवेशक सोने जैसे 'बिना ब्याज वाले' एसेट के बजाय बॉन्ड में निवेश करना ज्यादा पसंद करते हैं, जिससे सोने की मांग घट जाती है।
ब्याज दरों में कटौती पर संशय
वैश्विक बाजार को उम्मीद थी कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व जल्द ही ब्याज दरों में बड़ी कटौती करेगा, जिससे सोने की कीमतों को और सपोर्ट मिलता। लेकिन अमेरिका में महंगाई के आंकड़े अभी भी नियंत्रण से बाहर हैं, जिसके कारण ब्याज दरों में कटौती की संभावना टलती दिख रही है। ऊँची ब्याज दरें हमेशा सोने के लिए नकारात्मक होती हैं। निवेशकों को लगता है कि अगर ब्याज दरें कम नहीं हुईं, तो सोने में निवेश करने पर मिलने वाला रिटर्न अन्य विकल्पों के मुकाबले कम रह सकता है। यही संशय सोने और चांदी की चमक को फीका कर रहा है।
चीन की केंद्रीय बैंक का रुख
सोने की कीमतों को प्रभावित करने में चीन का बहुत बड़ा हाथ होता है। पिछले काफी समय से चीन का केंद्रीय बैंक (People's Bank of China) लगातार सोने की खरीदारी कर रहा था, जिसने वैश्विक स्तर पर कीमतों को ऊपर बनाए रखा था। लेकिन हालिया रिपोर्टों के अनुसार, चीन ने अपनी सोने की खरीदारी की रफ्तार धीमी कर दी है। दुनिया के सबसे बड़े सोना खरीदार देश की ओर से मांग में कमी आना, अंतरराष्ट्रीय बाजार के लिए एक बड़ा संकेत है, जिससे कीमतों में गिरावट का रुख बना हुआ है।
