अगर आप सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर हैं और अपने वीडियो में किसी कंपनी के प्रोडक्ट का ऐड करते हों तो संभल जाइए, एक चूक आपको लाखों का नुकसान करा सकती है। सरकार ने सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर के लिए एक नया रूल लाया है ताकि भ्रामक विज्ञापन को रोका जा सके।
सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर के लिए बना सख्त कानून (प्रतीकात्मक फोटो- pixabay)
क्या है कानून
इस कानून के तहत अब सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर को विज्ञापन के बारे में बताना होगा। वो भी साफ-साफ शब्दों में। वीडियो में भी प्रचार के बारे में बताना होगा। इस कानून के तहत वो सिर्फ उन्हीं प्रोडक्ट्स का प्रचार कर पाएंगे, जिसका वो इस्तेमाल करते हों। वो प्रोडक्ट को बढ़ा-चढ़ाकर कर बता नहीं सकते हैं।
कब लगेगा जुर्माना
अगर कोई भी सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर किसी भी तरह का भ्रामक विज्ञापन करता है। सरकार के गाइडलाइन का पालन नहीं करता है तो उसे सजा भुगतनी पड़ेगी। उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 के तहत भ्रामक विज्ञापन के लिए निर्धारित जुर्माना लगाया जाएगा। पहली बार गलती पकड़े जाने पर 10 लाख तक जुर्माना लगाया जा सकता है।
50 लाख का जुर्माना कब
बार-बार गलती करने पर 50 लाख तक का जुर्माना लगया जा सकता है। इसके अलावा प्राधिकरण किसी भ्रामक विज्ञापन का प्रचार करने वाले को एक साल तक किसी भी विज्ञापन से रोक सकता है जिसे तीन साल तक बढ़ाया भी जा सकता है।
कितने का बाजार
वर्ष 2022 में भारत में सोशल मीडिया इंफ्लूएंसर बाजार 1,275 करोड़ रुपये का था। लेकिन वर्ष 2025 तक इसके लगभग 19-20 प्रतिशत वार्षिक वृद्धि दर के साथ 2,800 करोड़ रुपये हो जाने की संभावना है।" वर्ष 2022 में भारत में सोशल मीडिया इंफ्लूएंसर बाजार 1,275 करोड़ रुपये का था। लेकिन वर्ष 2025 तक इसके लगभग 19-20 प्रतिशत वार्षिक वृद्धि दर के साथ 2,800 करोड़ रुपये हो जाने की संभावना है।
