Biggest mango exporter: गर्मियां शुरू होते ही बाजार की आम की डिमांड बढ़ जाती है, लेकिन क्या आप जानते हैं भारत का सबसे बड़ा आम एक्सपोर्टर कौन है? वो और कोई नहीं बल्कि एशिया के सबसे अमीर शख्स मुकेश अंबानी (Mukesh Ambani) ही हैं। जब भी रिलायंस इंडस्ट्रीज या मुकेश अंबानी का नाम आता है, तो हमारे दिमाग में तेल, रिफाइनरी, टेलीकॉम (Jio) या रिटेल सेक्टर की छवि उभरती है। दुनिया के सबसे अमीर व्यक्तियों में शुमार मुकेश अंबानी भारत के 'मैंगो किंग' भी कहे जाते हैं। रिलायंस इंडस्ट्रीज के पास न केवल भारत का, बल्कि दुनिया के सबसे बड़े आम के बागों में से एक है। गुजरात के जामनगर में स्थित यह विशाल बाग आज दुनिया भर में भारतीय आमों की मिठास पहुंचा रहा है और रिलायंस को दुनिया का एक प्रमुख मैंगो एक्सपोर्टर बना चुका है।
प्रदूषण रोकने की कोशिश से हुई शुरुआत
इस विशाल आम के बाग की कहानी व्यापार से नहीं, बल्कि पर्यावरण की रक्षा के उद्देश्य से शुरू हुई थी। जामनगर में रिलायंस की विशाल रिफाइनरी स्थित है। 1990 के दशक के उत्तरार्ध में, रिफाइनरी से निकलने वाले प्रदूषण के स्तर को कम करने और पर्यावरण को संतुलित करने के लिए कंपनी ने बंजर जमीन पर पेड़ लगाने का फैसला किया। रिफाइनरी के पास की जमीन काफी हद तक ऊसर और रेतीली थी, जहां खेती करना नामुमकिन माना जाता था। लेकिन आधुनिक तकनीक और इच्छाशक्ति के दम पर रिलायंस ने इस बंजर इलाके को एक विशाल हरे-भरे नखलिस्तान में बदल दिया।
धीरूभाई अंबानी लखीबाग
इस बाग का नाम रिलायंस के संस्थापक धीरूभाई अंबानी के सम्मान में 'धीरूभाई अंबानी लखीबाग अमराई' रखा गया है। यह बाग लगभग 600 एकड़ से अधिक क्षेत्र में फैला हुआ है। यहां आम के 1.5 लाख से भी ज्यादा पेड़ हैं, जिनमें केसर, अलफांसो (हापुस), रत्ना, सिंधु, नीलम और आम्रपाली जैसी 200 से अधिक देशी और विदेशी किस्में उगाई जाती हैं। इस बाग की सबसे खास बात यह है कि यहां खेती के लिए रिफाइनरी के वेस्ट वाटर (साफ किया हुआ पानी) और ड्रिप इरिगेशन जैसी आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया जाता है, जिससे पानी की बचत होती है और पैदावार भी शानदार होती है।
दुनिया भर में भारतीय आमों का डंका
जामनगर के इन बागों से निकलने वाले आमों की गुणवत्ता इतनी बेहतरीन होती है कि इनकी मांग पूरी दुनिया में है। रिलायंस आज दुनिया के सबसे बड़े आम निर्यातकों में से एक बन गया है। यहां से आमों को ब्रिटेन, अमेरिका, यूरोप और खाड़ी देशों में बड़े पैमाने पर एक्सपोर्ट किया जाता है। 'आर-मैंगो' (R-Mango) ब्रांड के नाम से बेचे जाने वाले ये आम अंतरराष्ट्रीय मानकों पर खरे उतरते हैं। यह केवल एक व्यापारिक उपलब्धि नहीं है, बल्कि इस बात का प्रमाण भी है कि अगर तकनीक और सही सोच का मेल हो, तो रेगिस्तान जैसी जमीन से भी सोना उगाया जा सकता है।
किसानों के लिए प्रेरणा और सहायता
मुकेश अंबानी का यह प्रोजेक्ट केवल मुनाफे तक सीमित नहीं है। रिलायंस इस बाग के माध्यम से स्थानीय किसानों को भी आधुनिक खेती के गुर सिखाता है। किसानों को अच्छी गुणवत्ता वाले पौधे उपलब्ध कराए जाते हैं और उन्हें कम पानी में ज्यादा पैदावार लेने की तकनीक बताई जाती है। इससे जामनगर और आसपास के इलाकों के हजारों किसानों की आय में सुधार हुआ है। पर्यावरण संरक्षण के एक छोटे से कदम ने आज भारत को वैश्विक स्तर पर आम के व्यापार में एक नई पहचान दिलाई है।
