Women Empowerment: अडानी फाउंडेशन की चेयरपर्सन डॉ. प्रीति अडानी ने कहा कि कोई भी देश अपनी आधी आबादी को आर्थिक गतिविधियों से बाहर रखकर सतत विकास हासिल नहीं कर सकता। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत को अपने समृद्ध इतिहास से सीख लेकर महिलाओं की शक्ति को पहचानना होगा, जो अभी भी पूरी तरह उजागर नहीं हुई है। डॉ प्रीति अडानी ने यह बात राष्ट्रीय राजधानी में चिंतन रिसर्च फाउंडेशन द्वारा आयोजित 'सशक्त नारी, विकसित भारत' कार्यक्रम में कही। उन्होंने बताया कि ग्रामीण इलाकों में महिलाओं को संगठित कर डेयरी समूह बनाए गए हैं। वर्तमान में 3,500 से अधिक ग्रामीण महिलाएं इन डेयरी समितियों से जुड़ी हैं और सालाना लगभग 75 लाख लीटर दूध का संग्रह करती हैं। इससे उनकी आय स्थिर हुई है, सौदेबाजी की क्षमता बढ़ी है और सबसे महत्वपूर्ण, उनका आत्मविश्वास मजबूत हुआ है।
डॉ प्रीति अडानी ने कहा कि भारत की विकास कहानी महिलाओं की बदौलत (तस्वीर-X)
शिक्षा और कौशल विकास पर जोर
न्यूज एजेंसी आईएएनएस के मुताबिक डॉ प्रीति अडानी ने कहा कि देश के कई दूर-दराज ग्रामीण इलाकों में लड़कियों की शिक्षा का स्तर बहुत कम है। कई महिलाएं ऐसी हैं जिन्होंने कभी स्कूल नहीं देखा और कॉलेज तक जाना उनके लिए सपना ही है। ऐसे में शिक्षा और कौशल विकास जरूरी हैं। उन्होंने समझाया कि महिला सशक्तिकरण सिर्फ आर्थिक मदद तक सीमित नहीं होना चाहिए। यह समग्र होना चाहिए। इसमें लड़कियों की शिक्षा, युवतियों के लिए कौशल प्रशिक्षण, महिलाओं को वित्तीय सहायता, डिजिटल साक्षरता, स्वास्थ्य सुरक्षा, नेतृत्व प्रशिक्षण और महिला उद्यमों के लिए बाजार से जुड़ाव शामिल होना चाहिए। डॉ. अडानी ने कहा कि जो लड़की स्कूल में बनी रहती है, उसके कम उम्र में विवाह की संभावना कम होती है और वह आगे पढ़ाई कर रोजगार के अवसर अपना सकती है। स्वास्थ्य सेवा, कृषि, डिजिटल सेवाएं, नवीकरणीय ऊर्जा और विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में प्रशिक्षित युवतियां आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकती हैं।
सरकार की योजनाओं का योगदान
अडानी फाउंडेशन की चेयरपर्सन ने केंद्र सरकार की कई योजनाओं का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री मुद्रा योजना छोटे उद्यमियों को लोन उपलब्ध कराती है। डिजिटल इंडिया अभियान ने दूरदराज़ इलाकों तक डिजिटल सुविधाएं पहुंचाई हैं। वहीं प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना ने स्वच्छ ईंधन उपलब्ध कर लाखों महिलाओं के स्वास्थ्य और सम्मान में सुधार किया है।
महिलाओं के लिए और भी समर्थन की जरुरत
डॉ प्रीति अडानी ने कहा कि महिलाओं के नेतृत्व वाले उद्यमों के लिए केवल लोन पर्याप्त नहीं है। उन्हें कौशल, डिजिटल ज्ञान, बाजार तक पहुंच, बुनियादी ढांचा, मार्गदर्शन और सहयोगी वातावरण की जरूरत भी है। उन्होंने भरोसा जताया कि भारत की अगली विकास गाथा स्कूलों, प्रशिक्षण केंद्रों, गांवों के उद्यमों और डिजिटल बाजारों में आत्मविश्वास से भरी महिलाओं द्वारा लिखी जाएगी। डॉ. अदाणी ने सभी को प्रेरित किया कि महिलाओं की शक्ति और योगदान को पहचान कर उनके लिए अवसर बढ़ाए जाएं। उनका कहना था कि जब महिलाएं सशक्त होती हैं, तो समाज और देश दोनों मजबूत बनते हैं।
कौन हैं डॉ. प्रीति अडानी?
डॉ प्रीति अडानी, अडानी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अडानी की पत्नी और अडानी फाउंडेशन की चेयरपर्सन हैं, जो एशिया के प्रमुख गैर-लाभकारी फाउंडेशनों में से एक है, जिसमें 7 बिलियन अमेरिकी डॉलर की प्रतिबद्धता और 100 मिलियन अमेरिकी डॉलर की वार्षिक राशि शामिल है। यह फाउंडेशन अडानी समूह का कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) शाखा के रूप में काम करता है। अहमदाबाद मुख्यालय वाला भारत का सबसे तेजी से बढ़ता और विविधतापूर्ण व्यवसाय समूह। डॉ अदाणी 1996 से परिवर्तनकारी सामाजिक पहलों का नेतृत्व कर रही हैं, जब उन्होंने चिकित्सा करियर छोड़कर सार्वजनिक सेवा को समर्पित होने का फैसला किया। जो एक समय कुछ गाँवों में मामूली कल्याण कार्यक्रम था, वह अब एक शक्तिशाली राष्ट्रीय आंदोलन बन गया है। आज अडानी फाउंडेशन हर साल 22 भारतीय राज्यों के 7,071 गांवों में 9.6 मिलियन लोगों के जीवन को प्रभावित कर रहा है।
