वित्त वर्ष 2025-26 (Financial Year 2025-26) के खत्म होने के बाद अब इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करने का समय नजदीक आ रहा है, और यह समय उन नौकरीपेशा लोगों के लिए बेहद सतर्क रहने का है जिन्होंने हाल-फिलहाल में अपनी नौकरी बदली (Job Switch) है। टैक्स एक्सपर्ट्स के अनुसार, एक ही वित्त वर्ष में दो या दो से अधिक नियोक्ताओं (Employers) के साथ काम करने वाले सैलरीड प्रोफेशनल्स के लिए आईटीआर फाइल करने की प्रक्रिया आम दिनों के मुकाबले थोड़ी अलग और जटिल हो जाती है।
अगर आपने भी इस दौरान जॉब चेंज की है, तो आपको टैक्स असेसमेंट के समय किसी भी कानूनी पचड़े या टैक्स नोटिस से बचने के लिए तुरंत कुछ जरूरी काम निपटा लेने चाहिए, वरना न सिर्फ आपका टैक्स रिफंड अटक सकता है बल्कि आपको भारी पेनाल्टी भी भरनी पड़ सकती है। अक्सर लोग यह सोचते हैं कि नई कंपनी में जॉइन करने के बाद उनका टैक्स अपने आप सही तरीके से कटता रहेगा, लेकिन हकीकत यह है कि जब तक आप पुरानी कंपनी की सैलरी और टैक्स कटौती का पूरा विवरण अपने नए एंप्लॉयर को नहीं सौंपते, तब तक दोनों कंपनियां आपको मिलने वाली बेसिक टैक्स छूट (Standard Deduction) और टैक्स स्लैब का लाभ अलग-अलग दे देती हैं, जिससे बाद में आपकी टैक्स देनदारी अचानक बढ़ जाती है।
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इस उलझन से बचने और अपना आईटीआर बिल्कुल एरर-फ्री (त्रुटिहीन) दाखिल करने के लिए सबसे पहला और महत्वपूर्ण काम यह है कि आपको अपने वर्तमान और पिछले, दोनों नियोक्ताओं से फॉर्म 16 (Form 16) इकट्ठा करना होगा। फॉर्म 16 एक ऐसा दस्तावेज है जो आपकी कुल सैलरी और उस पर काटे गए टीडीएस (TDS) का पूरा प्रमाण होता है; अगर आपने साल के बीच में नौकरी बदली है तो आपके पास दो अलग-अलग फॉर्म 16 होंगे और आईटीआर भरते समय इन दोनों में दर्ज आय को जोड़कर अपनी कुल टैक्सेबल इनकम निकालनी होगी।
दूसरा सबसे जरूरी काम यह है कि आपको अपने नए एंप्लॉयर को फॉर्म 12बी (Form 12B) भरकर देना चाहिए था, लेकिन अगर आप वित्तीय वर्ष के दौरान ऐसा करना भूल गए हैं, तो अब आपको खुद ही दोनों कंपनियों की ग्रॉस सैलरी को कैलकुलेट करना होगा ताकि टैक्स लायबिलिटी का सही आकलन हो सके। इसके बाद, तीसरा कदम यह सुनिश्चित करना है कि आप अपने फॉर्म 26एएस (Form 26AS) और एनुअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट (AIS) को इनकम टैक्स विभाग की वेबसाइट से डाउनलोड करके अच्छी तरह चेक कर लें, क्योंकि इसमें दोनों कंपनियों द्वारा काटा गया टीडीएस सही-सही रिफ्लेक्ट होना अनिवार्य है; यदि कोई विसंगति (Mismatch) मिलती है तो रिफंड का दावा खारिज हो सकता है।
चौथा काम जो आपको तुरंत करना चाहिए, वह है अपने ईपीएफ (EPF) अकाउंट का मर्जर और डिक्लेरेशन। जब आप नौकरी बदलते हैं, तो आपका पुराना पीएफ अकाउंट नंबर बदल जाता है, इसलिए ईपीएफओ (EPFO) के पोर्टल पर जाकर पुराने अकाउंट के बैलेंस को नए यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (UAN) के तहत ट्रांसफर कर लें, क्योंकि एक सीमा से अधिक पीएफ कंट्रीब्यूशन पर मिलने वाला ब्याज भी अब टैक्स के दायरे में आता है। पांचवां और अंतिम काम यह है कि दोनों कंपनियों से मिले टैक्स डिडक्शन (HRA, 80C, 80D आदि) के दावों का मिलान कर लें, क्योंकि कई बार अनजाने में यात्री दोनों जगह एक ही निवेश का दोहरा लाभ (Double Benefit) ले लेते हैं, जिसे टैक्स विभाग चोरी मानता है।
अगर इन सब कैलकुलेशंस के बाद आपकी टैक्स देनदारी बनती है, तो रिटर्न फाइल करने से पहले Self-Assessment Tax के रूप में उसका भुगतान कर दें। संक्षेप में, नौकरी बदलना आपके करियर के लिए एक बेहतरीन कदम हो सकता है, लेकिन टैक्स के मोर्चे पर यह थोड़ी सी भी लापरवाही आपके रिफंड को रोक सकती है; इसलिए इन पांचों कामों को समय रहते पूरा करें और एक जिम्मेदार नागरिक की तरह अपना सटीक आईटीआर दाखिल करें।
