India $5 Trillion Economy : भारत की अर्थव्यवस्था को पिछले 1 साल में कई झटके लगे हैं। खासतौर पर पश्चिम एशिया के युद्ध की वजह से ईंधन की कीमतें बढ़ने का असर इकोनॉमी पर दबाव बढ़ा रहा है। 2047 तक भारत के विकसित राष्ट्र बनने, 2030 तक 5 ट्रिलियन डॉलर की इकोनॉमी बनने और 2070 तक नेट जीरो इमिशन का लक्ष्य हासिल करने की राह मुश्किल नजर आने लगी है।
संसद में वित्त मंत्री ने बताया दूर नहीं लक्ष्य
लेकिन, केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में बताया है कि भले ही वैश्विक चुनौतियों ने हमारी रफ्तार कम की है, लेकिन इसके बाद भी भारत वित्त वर्ष 2028-29 तक 5.1 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकती है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने राज्यसभा में बताया कि अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के अनुमान के अनुसार वित्त वर्ष 2028-29 तक भारत की अर्थव्यवस्था करीब 5.1 ट्रिलियन डॉलर की हो सकती है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए सरकार निवेश, मैन्युफैक्चरिंग, कृषि, निर्यात, इंफ्रास्ट्रक्चर और डिजिटल इकोनॉमी पर आधारित व्यापक रणनीति पर काम कर रही है।
IMF ने क्या अनुमान लगाया?
राज्यसभा में एक सवाल के लिखित जवाब में वित्त मंत्री ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के अप्रैल 2026 वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक के मुताबिक मौजूदा कीमतों के आधार पर भारत का सकल घरेलू उत्पाद (GDP) वर्ष 2028-29 में करीब 5.1 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है।
क्या है सरकार की ग्रोथ स्ट्रैटेजी?
वित्त मंत्री ने बताया कि सरकार ने आर्थिक विकास को गति देने के लिए कई प्रमुख क्षेत्रों पर फोकस किया है। इनमें खासतौर पर कृषि उत्पादकता बढ़ाना, मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देना, MSME को मजबूत करना, बड़े पैमाने पर इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण, लॉजिस्टिक्स और कारोबार करने में आसानी बढ़ाना, आयकर और GST सुधारों के जरिये बेहतर टैक्स सिस्टम बनाना, इनोवेशन और डिजिटलाइजेशन को बढ़ावा देना, स्किल डेवलपमेंट और मानव संसाधन को मजबूत करना शामिल हैं। इसके साथ ही सरकार का जोर ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने पर भी है। सरकार का कहना है कि सार्वजनिक पूंजीगत खर्च, प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) को बढ़ावा, निर्यात विस्तार और मजबूत राजकोषीय प्रबंधन भी इस रणनीति का अहम हिस्सा हैं।
मैन्युफैक्चरिंग और MSME पर खास जोर
निर्मला सीतारमण ने बताया कि घरेलू उत्पादन और रोजगार बढ़ाने के लिए सरकार कई योजनाएं चला रही है। इनमें प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) योजना, मेक इन इंडिया, राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स नीति, राष्ट्रीय सिंगल विंडो सिस्टम और पीएम गतिशक्ति योजना प्रमुख हैं। इसके अलावा MSME सेक्टर को मजबूत करने के लिए सरकार ने
क्रेडिट गारंटी बढ़ाई है। इमरजेंसी क्रेडिट गारंटी स्कीम लागू की है। इसके साथ ही MSME की नई परिभाषा लागू की है, जिससे ट्रेड रिसीवेबल्स डिस्काउंटिंग सिस्टम (TReDS) को मजबूत किया। सरकार ने उद्यम रजिस्ट्रेशन को भी आसान बनाया है। सरकारी ई-मार्केटप्लेस (GeM) तक पहुंच बढ़ाई है और पीएम विश्वकर्मा योजना के जरिये सहायता दी जा रही है।
सर्विस सेक्टर के लिए भी बड़े कदम
इकोनॉमी को बड़ा बनाने के रोडमैप की जानकारी देते हुए वित्त मंत्री ने बताया कि सर्विस सेक्टर को मजबूत करने के लिए सरकार डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC), मेडिकल वैल्यू ट्रैवल, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डिजिटल इकोसिस्टम पर निवेश कर रही है। इसके साथ ही उन्होंने बताया कि सरकार ने
बजट 2026-27 में इस क्षेत्र के लिए कई नई घोषणाएं भी की गई हैं। सर्विस सेक्टर में नए मौके बढ़ाने के लिए राष्ट्रीय आतिथ्य संस्थान की स्थापना की गई है। क्षेत्रीय मेडिकल हब बनाए जा रहे हैं। एलाइड हेल्थ प्रोफेशनल संस्थानों का विस्तार किया जा रहा है। AVGC कंटेंट क्रिएटर लैब और यूनिवर्सिटी टाउनशिप को बढ़ावा दिया जा रहा है।
कृषि और नई इंडस्ट्री पर फोकस
वित्त मंत्री का कहना है कि 5 ट्रिलियन डॉलर की इकोनॉमी का सपना पूरा करने में कृषि क्षेत्र भी अहम है। इसके लिए सरकार सिंचाई, खेती में डिजिटल समाधान, फसल विविधीकरण, भंडारण और किसानों की बाजार तक पहुंच बेहतर बनाने पर काम कर रही है। इसके साथ ही सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स, बायोफार्मा, रेयर अर्थ, केमिकल्स, कैपिटल गुड्स, क्लीन एनर्जी और एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग जैसे उभरते क्षेत्रों को भविष्य की ग्रोथ का इंजन माना गया है।
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