म्यूचुअल फंड में SIP (Systematic Investment Plan) के जरिए निवेश करना लंबे समय में पैसा बनाने का एक आसान तरीका माना जाता है। इसमें हर महीने एक तय रकम निवेश की जाती है, लेकिन समय के साथ आय बढ़ने, खर्च बदलने और वित्तीय लक्ष्य करीब आने पर SIP की रकम में बदलाव की जरूरत पड़ सकती है। ऐसे में सवाल है कि SIP कब बढ़ानी चाहिए और कब इसे रोकने पर विचार करना चाहिए?
एसआईपी का अमाउंट कब बढ़ाना चाहिए कब नहीं (Photo: iStock)
कब बढ़ाना चाहिए SIP Amount
एसआईपी बढ़ाने की बात करें तो अगर आपकी सैलरी या आमदनी बढ़ गई है और जरूरी खर्चों के बाद हर महीने कुछ रकम बच रही है तो SIP की राशि बढ़ाने पर विचार किया जा सकता है। इसे SIP Step-Up या Top-Up SIP भी कहा जाता है। उदाहरण के लिए अगर आप हर महीने 5,000 की SIP कर रहे हैं और आपकी आय बढ़ती है, तो इसे 6,000 या 7,000 रुपये तक बढ़ाया जा सकता है। इससे लंबी अवधि में निवेश की कुल रकम और संभावित रिटर्न दोनों बढ़ सकते हैं।
SIP बढ़ाने का एक और अच्छा समय तब हो सकता है जब आपके जरूरी खर्च पहले की तुलना में कम हो जाएं। जैसे कोई लोन खत्म हो गया हो या मासिक खर्च में कमी आना। हालांकि, SIP बढ़ाने से पहले इमरजेंसी फंड और जरूरी वित्तीय जरूरतों के लिए अलग से रकम रखना जरूरी है।
कब कम करना चाहिए SIP Amount
अब सवाल आता है कि SIP रोकने पर कब विचार किया जा सकता है। केवल बाजार में गिरावट देखकर SIP बंद करना आमतौर पर सही आधार नहीं माना जाना चाहिए। बाजार ऊपर-नीचे होता रहता है और SIP का उद्देश्य ही अलग-अलग बाजार स्तरों पर नियमित निवेश करना है। लेकिन अगर आपकी आय में बड़ी कमी आ गई है, नौकरी चली गई है या अचानक कोई बड़ा जरूरी खर्च सामने आ गया है तो कुछ समय के लिए SIP की रकम कम करने या रोकने पर विचार किया जा सकता है।
इसी तरह अगर आपका वित्तीय लक्ष्य पूरा होने के करीब है और आपको जल्द ही निवेश की रकम की जरूरत पड़ने वाली है, तो पोर्टफोलियो की समीक्षा जरूरी है। ऐसे समय में जोखिम कम करने के लिए निवेश को धीरे-धीरे सुरक्षित विकल्पों की ओर ले जाने पर विचार किया जा सकता है।
जल्दबाजी में न लें फैसला
SIP बढ़ाने या रोकने का फैसला किसी एक नियम से नहीं किया जाना चाहिए। आय, खर्च, इमरजेंसी फंड, निवेश का लक्ष्य और समय अवधि को ध्यान में रखकर ही निर्णय लेना बेहतर है। सबसे जरूरी बात यह है कि निवेश की समीक्षा समय-समय पर करें, लेकिन बाजार की छोटी अवधि की तेजी या गिरावट देखकर जल्दबाजी में फैसला न लें।
