तेल का खेल: जब बढ़ती हैं कीमतें, तो आखिर किसकी जेब भरती है? ईरान-अमेरिका वॉर से समझें पूरा गणित

जब भी दुनिया में जंग होती है तो कच्चे तेल कीमतें सबसे ज्यादा प्रभावित होती हैं लेकिन आपने क्या कभी सोचा है कि जब कच्चे तेल की कीमतें बढ़ती हैं किसे सबसे ज्यादा फायदा होता है?

जब भी दुनिया के किसी कोने में युद्ध छिड़ता है, खासकर उन इलाकों में जहां से तेल की सप्लाई होती है, तो सबसे पहले कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें आसमान छूने लगती हैं। ईरान-अमेरिका के बीच बढ़ता तनाव हो या रूस-यूक्रेन का लंबा खिंचता युद्ध, इन सबका सीधा असर आपकी जेब पर पड़ता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जब आप पेट्रोल पंप पर प्रति लीटर एक्स्ट्रा पैसे चुकाते हैं, तो वह अतिरिक्त मुनाफा आखिर किसकी तिजोरी में जाता है? यह केवल महंगाई की बात नहीं है, बल्कि अरबों डॉलर के मुनाफे का एक जटिल खेल है। ऐसे में आइए जानते हैं दुनिया में जब भी जंग होती है और तेल की कीमतें बढ़ती हैं तो किसके पास पैसा जाता है?

Crude Oil Game

किसकी होती है कमाई?

तेल की कीमतें बढ़ने का सबसे बड़ा और सीधा फायदा उन देशों को होता है जो कच्चे तेल का निर्यात करते हैं, जिन्हें हम 'OPEC+' देशों के रूप में जानते हैं। सऊदी अरब, रूस, ईरान और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देशों की अर्थव्यवस्था पूरी तरह तेल पर टिकी है। जब युद्ध या तनाव के कारण सप्लाई कम होने का डर पैदा होता है, तो तेल की मांग बढ़ जाती है। ऐसे में ये देश उसी मात्रा में तेल बेचकर पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा राजस्व वसूलते हैं। रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों के बावजूद, बढ़ी हुई कीमतों ने रूस की अर्थव्यवस्था को एक बड़ा सहारा दिया था।

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