अपना घर खरीदना किसी बड़े सपने को पूरा होना हाता है। हालांकि, इसके साथ ही प्रॉपर्टी टैक्स (Property Tax) की जिम्मेदारी आती है। बता दें कि प्रॉपर्टी टैक्स, जिसे हाउस टैक्स भी कहते हैं, म्युनिसिपल अथॉरिटीज (नगर निगम) वसूलती हैं। चाहे आपके पास खुद का मकान हो, दुकान हो या खाली जमीन, स्थानीय नगर निगम को हर साल टैक्स देना अनिवार्य होता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपके घर का टैक्स कैसे तय होता है? और क्या आप जानते हैं कि कुछ आसान तरीकों से आप इस टैक्स को कम भी कर सकते हैं? आइए आपके सभी सवालों के जवाब देते हैं।
प्रॉपर्टी टैक्स
प्रॉपर्टी टैक्स की गणना कैसे की जाती है?
आपको बता दें कि हर म्युनिसिपैलिटी का प्रॉपर्टी टैक्स कैलकुलेट करने का अपना तरीका हो सकता है, क्योंकि यह लोकल कानूनों और नियमों पर आधारित होता है।
प्रॉपर्टी टैक्स गणना करने में आमतौर पर ये 4 फैक्टर शामिल होते हैं:
- संपत्ति का क्षेत्रफल
- लोकेशन
- उपयोग का प्रकार
- वार्षिक किराया मूल्य
कई नगर निगम इस फॉर्मूले का इस्तेमाल करते हैं—
प्रॉपर्टी टैक्स = (बेस वैल्यू × बिल्ट-अप एरिया × एज फैक्टर × बिल्डिंग का टाइप × इस्तेमाल की कैटेगरी) - डेप्रिसिएशन।
घर के प्रॉपर्टी टैक्स कैलकुलेशन का आधार क्या होता है?
रेजिडेंशियल प्रॉपर्टी यानी घर के लिए हाउस टैक्स कैलकुलेट करते समय, कई बातों का ध्यान रखा जाता है, जिसमें प्रॉपर्टी की लोकेशन भी शामिल होता है। इसके अलावा प्रॉपर्टी की उम्र भी मायने रखती है, क्योंकि नई बिल्डिंग्स पर टैक्स रेट ज्यादा हो सकते हैं, लेकिन उन्हें ज्यादा डेप्रिसिएशन का फायदा मिल सकता है, जिससे बढ़ोतरी की भरपाई हो सकती है। इसके अलावा, प्रॉपर्टी का साइज भी टैक्स पर असर डालता है, बड़े घरों पर ज्यादा टैक्स लगता है।
ऑक्यूपेंसी भी एक भूमिका निभाती है, क्योंकि खुद रहने वाली प्रॉपर्टी पर किराए की प्रॉपर्टी से अलग टैक्स लग सकता है। प्रॉपर्टी का टाइप, जैसे इंडिपेंडेंट घर बनाम अपार्टमेंट भी टैक्स की रकम पर असर डाल सकते हैं। प्रॉपर्टी टैक्स देने में देरी पर पेनल्टी देना होता है। टैक्स देर से पेमेंट करने पर राज्य या म्युनिसिपैलिटी की पॉलिसी के आधार पर 5% से 20% तक का इंटरेस्ट चार्ज लग सकते हैं।
प्रॉपर्टी टैक्स बचाने के लिए ये तरीके करें इस्तेमाल
समय पर प्रॉपर्टी टैक्स का भुगतान करें। अधिकांश नगर निगम समय से पहले भुगतान करने पर 5%–10% की छूट देते हैं। वहीं, कई शहरों में वरिष्ठ नागरिकों और महिलाओं के नाम पर अतिरिक्त छूट मिलती है। इतना ही नहीं, डिजिटल इंडिया को बढ़ावा देने के लिए कई नगर निगम ऑनलाइन पेमेंट पर 2-3% की अतिरिक्त छूट देते हैं।
