क्या है जीविका-3? 10 हजार रुपए के बाद अब बिहार की महिलाओं को मिलेंगे कितने रुपए?

हार में ग्रामीण परिवर्तन परियोजना (बीआरटीपी)-जीविका-3 को मंजूरी दी गई है, जिसका उद्देश्य उत्पादकता, आय और रोजगार के अवसर बढ़ाना है। परियोजना की लागत तीन हजार करोड़ रुपए है, जिसमें 70% विश्व बैंक और 30% राज्य सरकार द्वारा वित्त पोषित किया जाएगा…

बिहार में ग्रामीण विकास और महिला सशक्तिकरण की मिसाल बन चुका 'जीविका' प्रोजेक्ट अब अपने एक नए और बेहद आधुनिक अवतार में कदम रख चुका है, जिसे 'जीविका-3' का नाम दिया गया है। पिछले करीब दो दशकों से बिहार की लाखों महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों (SHGs) के जरिए आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के बाद, अब सरकार का लक्ष्य इन्हें केवल 'मदद पाने वाला' नहीं, बल्कि 'बिजनेस लीडर' बनाना है। जीविका-3 का मुख्य उद्देश्य बिहार की ग्रामीण महिलाओं को छोटे-मोटे घरेलू कामों से निकालकर बड़े बाजार और मुनाफे वाले बिजनेस मॉडल से जोड़ना है।

Jeevika 3

क्या है जीविका 3?

जीविका-3 प्रोजेक्ट की सबसे बड़ी खासियत इसका 'एंटरप्रेन्योरशिप मॉडल' है। पहले के चरणों (जीविका-1 और 2) में फोकस महिलाओं को संगठित करने, बैंक से लोन दिलाने और बचत की आदत डालने पर था। लेकिन जीविका-3 में अब फोकस 'वैल्यू चेन' पर है। इसका मतलब है कि अगर कोई महिला समूह अचार या पापड़ बनाता है, तो सरकार अब उन्हें केवल बनाने की ट्रेनिंग नहीं देगी, बल्कि उनकी ब्रांडिंग, पैकेजिंग और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म (जैसे अमेजन या फ्लिपकार्ट) पर बेचने में भी मदद करेगी। इससे उनकी कमाई में कई गुना इजाफा होगा और वे सीधे तौर पर 'बिजनेस वुमन' की श्रेणी में आ जाएंगी।

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