सोचिए आपके ट्रेडिंग खाते में अचानक करोड़ों रुपये की मार्जिन राशि दिखने लगे। आप उस राशि का इस्तेमाल वायदा और विकल्प कारोबार यानी एफएंडओ ट्रेडिंग में करते हैं और बाजार में अपने फैसले और जोखिम के दम पर मुनाफा कमा लेते हैं। इसके बाद ब्रोकर को पता चलता है कि यह रकम उसके सिस्टम की गलती से आपके खाते में आई थी। अब सवाल है कि अगर आपने मूल रकम वापस कर दी, तो उससे कमाया गया मुनाफा किसका होगा? ऐसे ही एक पर बॉम्बे हाई कोर्ट ने अहम फैसला सुनाया।
गलती से अकाउंट में आए पैसों से बना लिया प्रॉफिट और लौटा दिए पैसे… तो मुनाफे पर किसका हक?
गलती से दिखा ₹40 करोड़ का मार्जिन
मामला 26 जुलाई 2022 का है। गजानन राजगुरु के कोटक सिक्योरिटीज ट्रेडिंग खाते में उस समय करीब ₹3,175 की रकम थी। लेकिन ब्रोकर के सिस्टम में तकनीकी गड़बड़ी आने के कारण उनके खाते में करीब ₹40 करोड़ का अतिरिक्त ट्रेडिंग मार्जिन दिखाई देने लगा। इस मार्जिन की मदद से उन्होंने फ्यूचर एंड ऑप्शन कारोबार में करीब ₹94.81 करोड़ के सौदे किए।
इन सौदों में शुरुआत में उन्हें करीब ₹54 लाख का नुकसान भी हुआ। लेकिन बाद में बाजार में स्थिति उनके पक्ष में गई और उन्होंने कुल करीब ₹2.38 करोड़ का बुक किया हुआ मुनाफा कमाया। नुकसान और दूसरे शुल्कों को मिलाने के बाद उनका शुद्ध मुनाफा करीब ₹1.75 करोड़ रहा। कोटक सिक्योरिटीज ने शुरुआत में इस मुनाफे को उनके खाते में जमा भी किया और कारोबार से जुड़े कर, शुल्क और दूसरे खर्च भी काटे। बाद में ब्रोकर ने इस मुनाफे की रकम को वापस खाते से हटा दिया।
असली सवाल था, मुनाफा किसका?
कोटक सिक्योरिटीज का कहना था कि यह मार्जिन उसकी सिस्टम संबंधी गलती की वजह से उपलब्ध हुआ था। इसलिए उस गलत तरीके से उपलब्ध हुए मार्जिन का इस्तेमाल करके कमाया गया मुनाफा भी ब्रोकर का होना चाहिए। दूसरी तरफ कारोबारी का कहना था कि उन्होंने खुद वायदा और विकल्प के सौदे किए, अपने फैसले लिए और बाजार का जोखिम उठाया। इसलिए मुनाफे पर उनका अधिकार बनता है। मामला पहले मध्यस्थता की प्रक्रिया में गया और बाद में बॉम्बे हाई कोर्ट पहुंचा।
बॉम्बे हाई कोर्ट ने क्या कहा?
3 दिसंबर 2025 को बॉम्बे हाई कोर्ट ने कोटक सिक्योरिटीज की याचिका खारिज करते हुए कहा कि इस मामले में ब्रोकर को कारोबारी द्वारा कमाया गया मुनाफा रखने की अनुमति नहीं दी जा सकती। कोर्ट ने माना कि गलत मार्जिन उपलब्ध होना ब्रोकर के सिस्टम की गलती थी और कारोबारी ने उस मौके का इस्तेमाल करते हुए अपने कौशल और जोखिम के आधार पर सौदे किए।
कोर्ट ने यह भी महत्वपूर्ण बात कही कि ब्रोकर ऐसा नहीं कर सकता कि नुकसान होने पर कारोबारी से पैसा वसूले, लेकिन मुनाफा होने पर वही मुनाफा खुद रख ले। कोर्ट के अनुसार, अगर गलत मार्जिन उपलब्ध कराने की वजह से ब्रोकर को कोई वास्तविक नुकसान नहीं हुआ और उसने सौदों पर ब्रोकरेज तथा दूसरे शुल्क भी लिए, तो केवल इस आधार पर मुनाफे पर अपना दावा नहीं कर सकता कि कारोबार के लिए मार्जिन उसकी तरफ से गलती से उपलब्ध हुआ था।
मतलब मुनाफा कारोबारी के पास रहेगा?
इस मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट ने अपीलीय मध्यस्थता न्यायाधिकरण के उस फैसले में दखल देने से इनकार किया, जिसके तहत कारोबारी को मुनाफा रखने का अधिकार दिया गया था। कोर्ट ने माना कि इन खास परिस्थितियों में मुनाफे को ब्रोकर को देने का दावा उचित नहीं है। हालांकि यह फैसला इस विशेष मामले के तथ्यों और परिस्थितियों पर आधारित है। इसे हर ऐसी घटना में अपने-आप लागू होने वाला सामान्य नियम नहीं माना जाना चाहिए।
इस मामले से सबसे बड़ी बात यह सामने आती है कि अगर किसी ब्रोकर की सिस्टम संबंधी गलती की वजह से किसी कारोबारी को गलत मार्जिन मिल जाता है, तो उससे हुए मुनाफे पर अधिकार तय करने के लिए केवल यह देखना पर्याप्त नहीं है कि मार्जिन किसका था। कोर्ट ने यह भी देखा कि सौदे किसने किए, जोखिम किसने लिया, ब्रोकर ने उस समय क्या कार्रवाई की और क्या ब्रोकर को वास्तविक नुकसान हुआ। इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए इस मामले में कारोबारी को मुनाफा रखने का अधिकार मिला।
