गोल्ड लोन नहीं भरा तो क्या होगा? जानें कब बैंक आपकी ज्वेलरी बेच सकता है?

जब आप गोल्ड लोन की किश्त या ब्याज समय पर नहीं चुकाते, तो बैंक इसे तुरंत 'डिफॉल्ट' की श्रेणी में डाल देता है। हालांकि, बैंक तुरंत आपकी ज्वेलरी नीलाम नहीं करता। शुरुआत में बैंक आपको रिमाइंडर भेजना शुरू करता है।

आज के दौर में इमरजेंसी में पैसों की जरूरत पूरी करने के लिए 'गोल्ड लोन' सबसे आसान और लोकप्रिय जरिया बन गया है। कम कागजी कार्रवाई और तुरंत पैसा मिल जाने के कारण लोग अपनी मेहनत की कमाई से जुड़ी ज्वेलरी बैंक या फाइनेंस कंपनियों के पास गिरवी रख देते हैं। लेकिन, कई बार आर्थिक तंगी या किसी अन्य कारण से लोग इस लोन की किश्तें (EMI) समय पर नहीं चुका पाते। ऐसे में मन में सबसे बड़ा डर यही होता है कि क्या बैंक हमारा सोना बेच देगा? गोल्ड लोन डिफॉल्ट होने की स्थिति में बैंक के पास क्या अधिकार हैं और एक ग्राहक के तौर पर आपके पास क्या विकल्प बचते हैं, आइए जानते हैं?

Gold Loan

डिफॉल्ट होने पर बैंक की पहली कार्रवाई

जब आप गोल्ड लोन की किश्त या ब्याज समय पर नहीं चुकाते, तो बैंक इसे तुरंत 'डिफॉल्ट' की श्रेणी में डाल देता है। हालांकि, बैंक तुरंत आपकी ज्वेलरी नीलाम नहीं करता। शुरुआत में बैंक आपको रिमाइंडर भेजना शुरू करता है। ये रिमाइंडर एसएमएस, ईमेल या फोन कॉल के जरिए हो सकते हैं। बैंक का मकसद आपको यह याद दिलाना होता है कि आपका भुगतान बकाया है। अगर आप फिर भी जवाब नहीं देते, तो बैंक 'पैनल इंटरेस्ट' (Penal Interest) यानी दंडात्मक ब्याज लगाना शुरू कर देता है। यह ब्याज आपकी सामान्य ब्याज दर से 2% से 3% तक अधिक हो सकता है, जिससे आपके ऊपर कर्ज का बोझ और बढ़ जाता है।

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