छापेमारी में जब्त करोड़ों रुपयों का क्या करती है ED? काफी चौंकाने वाला है जवाब!

जब भी हम कहीं छापेमारी की बात सुनते हैं तो दिमाग में सबसे पहला ख्याल आता है कि रेड या छापेमारी में पकडे गए पैसों का ED क्या करती है? क्या वह पैसा सीधे सरकारी खजाने में चला जाता है, या उसे ईडी के दफ्तर में अलमारी में बंद करके रखा जाता है?

जब भी टीवी चैनलों या अखबारों में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की छापेमारी की खबरें आती हैं, तो सबसे पहले लोगों का ध्यान नोटों के उन पहाड़ों पर जाता है जो किसी अलमारी, बिस्तर के नीचे या गुप्त तहखानों से बरामद होते हैं। बीते सालों में कई हाई-प्रोफाइल मामलों में करोड़ों की नकदी और किलो के हिसाब से सोना जब्त किया गया है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि छापेमारी खत्म होने के बाद उन रुपयों का क्या होता है? क्या वह पैसा सीधे सरकारी खजाने में चला जाता है, या उसे ईडी के दफ्तर में अलमारी में बंद करके रखा जाता है? आइए बताते हैं छापेमारी में पकड़े गए पैसों का क्या करती है ED?

Money Seized In Raid

तैयार होता है 'सीजर मेमो'

प्रक्रिया की शुरुआत छापेमारी के वक्त ही हो जाती है। जब ईडी को किसी संदिग्ध ठिकाने पर बड़ी मात्रा में नकदी मिलती है, तो उसे तुरंत 'जब्त' नहीं किया जाता, बल्कि पहले उसकी गिनती की जाती है। इसके लिए स्थानीय बैंक अधिकारियों को नोट गिनने वाली मशीनों के साथ बुलाया जाता है। नोटों की गिनती के बाद एक 'सीजर मेमो' (Seizure Memo) तैयार किया जाता है, जिसमें बरामद की गई राशि का पूरा ब्यौरा होता है। इस पर वहां मौजूद गवाहों और उस व्यक्ति के हस्ताक्षर लिए जाते हैं जिसके ठिकाने से पैसा मिला है। इसके बाद, उन रुपयों को बक्सों में भरकर सील कर दिया जाता है और पास के किसी सरकारी बैंक (आमतौर पर भारतीय स्टेट बैंक) की शाखा में ले जाया जाता है।

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