नए लेबर कोड में श्रमिकों और नौकरीपेशाा लोगों के लिए क्या बदला? यहां 8 प्वाइंट में समझें

भारत के ज्यादातर लेबर कानून आजादी से पहले और उसके तुरंत बाद बने थे। अब 4 नए लेबर कोड के जरिये आधुनिक, सरल और ग्लोबल स्टैंडर्ड के अनुरूप ढांचा तैयार किया गया है। ये कोड श्रमिकों को बेहतर सुरक्षा देंगे और कंपनियों के काम को आसान बनाएंगे।

केंद्र सरकार ने 4 नए लेबर कोड को लागू कर दिया है। नए लेबर कोड के आने से श्रमिकों और नौकरीपेशाा लोगों की वित्तीय स्थिति बेहतर होगी। उनको अब पहले से ज्यादा नौकरी में स्थिरता और लाभ मिलेगा। वहीं कंपनियों के लिए काम करना आसान होगा। इससे एक ओर जहां एक ईज ऑफ डूइंग बिजनेस रैकिंग में सुधार होगा, वहीं दूसरी ओर कामगारों को फायदा मिलेगा। आइए आपको 8 प्वाइंट में समझाते हैं कि यह पुराने कानून से कैसे अलग है और इसमें श्रमिकों और नौकरीपेशा वर्ग को क्या-क्या फायदे मिलेंगे।

नए लेबर कोड

नए लेबर कोड (Istock)

पुराने Vs नए लेबर कोड: क्या बदला आइए समझते हैं—

पुराने लेबर कानूननए 4 लेबर कोड
नियुक्ति पत्र अनिवार्य नहीं था।सभी कर्मचारियों को अनिवार्य नियुक्ति पत्र मिलेगा, जिससे पारदर्शिता और नौकरी सुरक्षा बढ़ेगी।
सोशल सिक्योरिटी कवरेज सीमित था।अब सोशल सिक्योरिटी सबके लिए: PF, ESIC, इंश्योरेंस सहित सभी लाभ; गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स भी शामिल होंगे।
न्यूनतम वेतन केवल चुनिंदा उद्योगों में लागू था।अब सभी के लिए न्यूनतम वेतन: Code on Wages, 2019 के तहत हर कर्मचारी को कानूनी न्यूनतम वेतन मिलेगा।
हेल्थकेयर का कोई नियम नहीं था।अब हर साल मुफ्त हेल्थ चेकअप: 40+ उम्र वाले सभी कर्मचारियों के लिए वार्षिक हेल्थ चेकअप अनिवार्य होगा।
वेतन समय पर देने की सख्त अनिवार्यता नहीं थी।अब कंपनी को समय पर वेतन देना अनिवार्य होगा।
महिलाओं की नाइट शिफ्ट व कुछ कामों में रोक थी।अब महिलाओं को बराबरी का मौका: सहमति और सुरक्षा के साथ महिलाएं हर काम और नाइट शिफ्ट में कार्य कर सकती हैं।
ESIC कवरेज सीमित—केवल कुछ क्षेत्रों और उद्योगों तक।ESIC कवरेज पूरे देश में: 10 से कम कर्मचारियों वाले संस्थान चाहें तो शामिल हो सकते हैं।
कई रजिस्ट्रेशन, लाइसेंस और रिटर्न भरने की झंझट थी।सिंगल रजिस्ट्रेशन और सिंगल रिटर्न: PAN-India सिंगल लाइसेंस से कंप्लायंस बोझ कम होगा।

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