क्या होता है ट्रेन टिकट में HO और इमरजेंसी कोटा? आखिर किसके लिए रिजर्व होता है ये कोटा?

ट्रेन टिकट बुक करते समय सीटें फुल दिखने पर भी रेलवे HO यानी हेडक्वार्टर कोटा और इमरजेंसी कोटा के तहत कुछ सीटें रिजर्व रखता है। यह कोटा वीआईपी, रेलवे अधिकारियों और गंभीर मेडिकल इमरजेंसी वाले आम यात्रियों के लिए होता है, जो चार्ट बनने से पहले कंफर्म होती हैं।

भारतीय रेलवे (Indian Railways) से सफर करने वाला हर यात्री कभी न कभी 'वेटिंग लिस्ट' (Waiting List) की कड़वी सच्चाई से जरूर रूबरू हुआ होगा। त्योहारों या शादियों के सीजन में जब आप महीनों पहले टिकट बुक करते हैं, तब भी कई बार 'नो रूम' (No Room) या लंबी वेटिंग लिस्ट दिखाई देती है। लेकिन क्या आपने कभी ध्यान दिया है कि ट्रेन छूटने से कुछ घंटे पहले जब पहला रिजर्वेशन चार्ट बनता है, तो अचानक सैकड़ों वेटिंग टिकट धड़ाधड़ कंफर्म हो जाते हैं? आखिर वो खाली सीटें अचानक कहां से आ जाती हैं, जो ऑनलाइन बुकिंग के समय गायब थीं? रेलवे के इस इनसाइड सिस्टम के पीछे काम करता है HO कोटा (Headquarters Quota) और इमरजेंसी कोटा (Emergency Quota)। इसे आम बोलचाल में 'VIP कोटा' भी कहा जाता है।

Indian Railway Waiting Ticket

क्या होता है HO और इमरजेंसी कोटा?

सबसे पहले इसका पूरा नाम जान लेते हैं। रेलवे की भाषा में HO का मतलब होता है 'हेडक्वार्टर कोटा' (Headquarters Quota) या कुछ लोग इसे 'हाई ऑफिशियल कोटा' (High Official Quota) भी कहते हैं। यह रेलवे का सबसे पावरफुल और असरदार रिजर्वेशन कोटा माना जाता है। भारतीय रेलवे अपनी हर ट्रेन की सभी बोगियों (चाहे वह स्लीपर हो, थर्ड एसी या फर्स्ट एसी) में कुछ सीटों या बर्थ को पहले से ही इस कोटे के तहत रिजर्व यानी ब्लॉक करके रखता है। ये सीटें आईआरसीटीसी (IRCTC) की वेबसाइट या काउंटर पर आम जनता के लिए बुकिंग के लिए उपलब्ध नहीं होती हैं। यही कारण है कि आम मुसाफिरों को ट्रेन में सीटें फुल दिखाई देती हैं, जबकि पर्दे के पीछे रेलवे के पास कुछ सीटें सुरक्षित बची होती हैं।

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