Target Maturity Funds: म्यूचुअल फंड (Mutual Fund) निवेश के लिए अच्छा ऑप्शन माना जाता है। इसमें आप हर महीने एसआईपी (SIP) के जरिए थोड़ा-थोड़ा पैसा जमा कर सकते हैं। म्यूचुअल फंड की कई कैटेगरी हैं। यदि आप कम जोखिम के साथ अच्छा रिटर्न चाहते हैं, तो डेब्ट फंड में से टारगेट मैच्योरिटी फंड एक बेहतर विकल्प हो सकता है। ये म्यूचुअल फंड सरकारी बॉन्ड में निवेश करते हैं और उन्हें मैच्योरिटी तक अपने पास रखते हैं। इन फंडों की पहले से तय अवधि के दौरान, बॉन्ड से मिले ब्याज को फिर से निवेश किया जाता है।
क्या है टारगेट मैच्योरिटी फंड
समझिए टारगेट मैच्योरिटी फंड की बारीकी
टारगेट मैच्योरिटी फंड (टीएमएफ) निवेशकों को फंड की मैच्योरिटी डेट के साथ डेब्ट म्यूचुअल फंड से जुड़े जोखिमों को मैनेज करने में मदद करते हैं। ये पैसिव डेब्ट म्यूचुअल फंड होते हैं जो अंडरलाइंग बॉन्ड (जिन बॉन्ड में निवेश किया गया है) इंडेक्स को ट्रैक करते हैं।
इन फंडों के पोर्टफोलियो में ऐसे बॉन्ड शामिल होते हैं जो अंडरलाइंग बॉन्ड इंडेक्स का हिस्सा होते हैं और इन बॉन्डों की मैच्योरिटी फंड की बताई गई मैच्योरिटी के आसपास होती है।
सेफ रहता है पैसा
इन फंडों में निवेश करना सुरक्षित है और यह अनुमानित फिक्स रिटर्न देते हैं क्योंकि यह सरकारी सिक्योरिटीज, पीएसयू बॉन्ड और स्टेट डेवलपमेंट लोन्स (एसडीएल) में निवेश करते हैं। इसलिए, इन फंडों में जोखिम अन्य डेट म्यूचुअल फंडों की तुलना में कम होता है।
किसके लिए हैं बेहतर
ये उन निवेशकों के लिए बेहतर हैं, जिनकी कम जोखिम लेने की क्षमता है। निवेशकों के लिए टारगेट मैच्योरिटी फंड में निवेश करने के कई कारण हैं। सबसे पहले तो यह आपके पोर्टफोलियो में डेब्ट कम्पोनेंट को पूरा करते हैं। इनमें निवेशकों को पैसा लॉक किए बिना फाइनेंशियल लक्ष्यों को पूरा करने के लिए फंड की अवधि के दौरान निवेश बरकरार रखने की सुविधा मिलती है।
डिस्क्लेमर : यहां मुख्य तौर पर म्यूचुअल फंड की जानकारी दी गयी है, निवेश की सलाह नहीं। म्यूचुअल फंड में जोखिम होता है, इसलिए निवेश अपने जोखिम पर करें। निवेश करने से पहले एक्सपर्ट की राय जरूर लें।
