देश की राजधानी दिल्ली में आयोजित 78वें चार्टर्ड अकाउंटेंट्स दिवस (CA Day 2026) के मौके पर उपराष्ट्रपति सी पी राधाकृष्णन (C. P. Radhakrishnan) ने महत्वपूर्ण संदेश दिया। उन्होंने कहा कि धन जीवन के लिए जरूरी है, लेकिन कभी भी खुशी की कीमत पर संपत्ति अर्जित नहीं करनी चाहिए। उनके अनुसार, सच्चा और संतुलित जीवन वही है जिसमें आर्थिक प्रगति के साथ मानसिक शांति और पारिवारिक खुशहाली भी बनी रहे।
उपराष्ट्रपति का संदेश: खुशी की कीमत पर संपत्ति नहीं, चार्टर्ड अकाउंटेंट्स से देश की वित्तीय व्यवस्था मजबूत करने की अपील (तस्वीर-X)
धन और खुशी के बीच संतुलन जरूरी
उपराष्ट्रपति ने अपने संबोधन में कहा कि धन इसलिए कमाया जाता है ताकि जीवन में सुख और सुविधा आ सके। लेकिन अगर धन कमाने की प्रक्रिया में खुशी और शांति खो जाए, तो ऐसे जीवन का कोई अर्थ नहीं रह जाता। उन्होंने कहा कि लोगों को न केवल धन कमाना चाहिए बल्कि उसका सही उपयोग भी करना चाहिए, ताकि परिवार और समाज में सकारात्मक प्रभाव पड़े। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि माता-पिता को अपने बच्चों को धन का महत्व समझाना चाहिए, ताकि अगली पीढ़ी जिम्मेदारी के साथ आर्थिक संसाधनों का उपयोग कर सके।
बच्चों में वित्तीय समझ जरूरी
उपराष्ट्रपति ने कहा कि अगर बच्चों को बचपन से ही धन के मूल्य और उपयोग की सही समझ दी जाए, तो यह हर माता-पिता की बड़ी सफलता होगी। इससे न केवल व्यक्तिगत जीवन बेहतर होगा बल्कि समाज में भी आर्थिक अनुशासन और जिम्मेदारी बढ़ेगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि पैसा सिर्फ संग्रह करने की चीज नहीं है, बल्कि यह जीवन को बेहतर बनाने का साधन है।
चार्टर्ड अकाउंटेंट्स की भूमिका पर जोर
न्यूज एजेंसी पीटीआई-भाषा के मुताबिक इसी कार्यक्रम में उपराष्ट्रपति ने चार्टर्ड अकाउंटेंट्स की भूमिका को देश की अर्थव्यवस्था में बेहद महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) वित्तीय व्यवस्था के भरोसे के संरक्षक होते हैं और उनके मानकों को किसी भी स्थिति में कमजोर नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर वित्तीय प्रणाली में भरोसा कमजोर होता है, तो पूरी अर्थव्यवस्था प्रभावित हो सकती है।
नैतिकता और ईमानदारी पर बल
उपराष्ट्रपति ने स्पष्ट कहा कि आर्थिक विकास तभी सार्थक है जब उसमें नैतिकता शामिल हो। बिना नैतिक मूल्यों के आर्थिक वृद्धि का कोई लाभ नहीं होता। उन्होंने भारतीय सनदी लेखाकार संस्थान (Institute of Chartered Accountants of India) की ईमानदारी, उत्कृष्टता, जवाबदेही और देश सेवा की परंपरा की सराहना की। उन्होंने यह भी कहा कि CA परीक्षा के उच्च मानकों के कारण इसमें असफल होने वालों की संख्या बहुत कम होती है, और इन मानकों को कमजोर करना सही नहीं होगा।
व्यवसाय और गुणवत्ता पर चेतावनी
उपराष्ट्रपति ने यह भी कहा कि देश में कारोबार सुगमता बढ़ाने के लिए कानूनी ढांचा मजबूत होना चाहिए, लेकिन गुणवत्ता से समझौता करके पैसा बचाने की कोशिश विनाशकारी साबित हो सकती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आर्थिक विकास के साथ गुणवत्ता और ईमानदारी दोनों जरूरी हैं।
CA और Cost Accountants की साझेदारी पर जोर
उन्होंने सुझाव दिया कि चार्टर्ड अकाउंटेंट और कॉस्ट अकाउंटेंट को मिलकर काम करना चाहिए, ताकि कंपनियों को लागत कम करने और बेहतर वित्तीय प्रबंधन में मदद मिल सके। इससे न केवल उद्योगों को लाभ होगा बल्कि देश की आर्थिक स्थिति भी मजबूत होगी। इस पूरे कार्यक्रम में उपराष्ट्रपति ने एक संतुलित संदेश दिया। जहां एक ओर उन्होंने व्यक्तिगत जीवन में खुशी और संतुलन की बात की, वहीं दूसरी ओर देश की वित्तीय प्रणाली में ईमानदारी, नैतिकता और उच्च मानकों को बनाए रखने पर जोर दिया। उनका संदेश यह था कि सच्ची प्रगति वही है जिसमें धन, नैतिकता और खुशहाली तीनों साथ-साथ चलें।
