USA Russia Buying Fuel From India : ग्लोबल एनर्जी मार्केट में इन दिनों जबरदस्त उठापटक चल रही है। खुद क्रूड के बड़े-बड़ें भंडार रखने वाले रूस और अमेरिका भारत से फ्यूल (पेट्रोल-डीजल) खरीद रहे हैं। दिलचस्प बात यह है कि अमेरिका और पश्चिमी देशों ने एक तरफ जहां रूसी (यूराल) क्रूड पर तमाम प्रतिबंध लगा रखे हैं। वहीं, भारत यूराल की रिकॉर्ड खरीद कर रहा है। मोटे तौर पर क्रूड के बिना भी भारत ग्लोबल एनर्जी मार्केट को स्थिर बनाए रखने में अहम भूमिका निभा रहा है।
अमेरिकी और रूस दोनों को फ्यूल बेच रहा भारत
अमेरिका की टैरिफधमकी
अमेरिका ने रूस से क्रूड खरीदने वाले देशों पर 100% टैरिफ लगाने की धमकी दी है। पिछले साल अमेरिका ने भारत पर रूसी क्रूड खरीदने की वजह से 25% टैरिफ लगाया था। हालांकि, अमेरिका की धमकियों के बीच भारत की रूस से क्रूड आयात रिकॉर्ड हाई स्तर पर है। इसके साथ ही भारत से अमेरिका को बेचा जाने वाला फ्यूल व्यापार भी तेजी से बढ़ रहा है।
कितना ईंधन खरीद रहा अमेरिका?
अमेरिकी ऊर्जा सूचना प्रशासन (EIA) के आंकड़ों के मुताबिक अमेरिका 2026 में भारत से करीब 131 हजार बैरल प्रतिदिन पेट्रोलियम उत्पाद आयात कर रहा है। जबकि, पिछले वर्ष यह 105 हजार बैरल प्रतिदिन के आसपास था।
रूस भी खरीद रहा पेट्रोल-डीजल
ऊर्जा संसाधनों के लिहाज से रूस दुनिया के सबसे संपन्न देशों में शामिल है। भारत को रूस पिछले कई वर्ष से सस्ता क्रूड बेच रहा है। यहां तक कि रूस यूरोप को ऊर्जा सप्लाई देने वाला सबसे बड़ा स्रोत है। लेकिन, यूक्रेन के साथ चल रहे युद्ध ने ऐसे हालात बना दिए हैं कि भारत रूस से क्रूड खरीद रहा है और फिर रूस भारत से डीजल-पेट्रोल खरीद रहा है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, रूस को 5 अगस्त को भारत से पेट्रोल की पहली खेप मिली। यह पेट्रोल गुजरात के वाडिनार स्थित नायरा एनर्जी की रिफाइनरी से निकली। करीब 42,000 टन की इस खेप को रूसी जहाज ने जून में वाडिनार से लोड किया था और बाद में मिस्र के दमियेटा के पास जहाज बदलकर इसे रूस पहुंचाया गया।
भारत बना बड़ा रिफाइनिंग हब
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, जून में भारत का रूस से कच्चे तेल का आयात रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गया था। वहीं, भारत की रिफाइनरियां इस क्रूड को प्रोसेस कर बड़े पैमाने पर पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यात कर रही हैं। वहीं, रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, जुलाई में भारत से रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यात करीब 1.55 मिलियन बैरल प्रतिदिन तक पहुंचने का अनुमान है। रूस और मध्य-पूर्व की रिफाइनरियों से सप्लाई घटने के बीच भारत ने इन निर्यातों के जरिए एशियाई बाजार में पैदा हुई कमी को भरने में बड़ी भूमिका निभाई।
क्या अमेरिका तक पहुंचा रूसी तेल
इकोनॉमिक टाइम्स और अन्य रिपोर्टों में सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर के आंकड़ों के हवाले से बताया गया कि जून में भारत, तुर्किये, ब्रुनेई और जॉर्जिया की रिफाइनरियों ने करीब 814 मिलियन यूरो पेट्रोलियम उत्पाद ऐसे देशों को निर्यात किए, जिन्होंने रूस पर प्रतिबंध लगाए हैं। इनमें अमेरिका भी शामिल था। इस कुल रकम में करीब 369 मिलियन यूरो के उत्पाद रूसी कच्चे तेल से रिफाइन किए गए थे। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि अमेरिका सीधे रूसी क्रूड खरीद रहा है।
क्यों बदल गया तेल का खेल
एनर्जी बाजार में इस स्थिति के पीछे पश्चिम एशिया का तनाव है। दुनिया की करीब 40 फीसदी एनर्जी सप्लाई पश्चिम एशिया से होती है। इसमें करीब 20 फीसदी हिस्सा होर्मुज से आता है, जो पिछले 6 महीने से अमेरिका-ईरान युद्ध की वजह से बंद है। ऐसे में दुनिया में क्रूड के साथ ही डीजल-पेट्रोल की आपूर्ति भी प्रभावित हो रही है। यह स्थिति भारतीय रिफाइनरीज के लिए आपदा में अवसर बनकर आया है, जिसे कंपनियां जमकर भुना रही हैं।
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