अमेरिका-ईरान वॉर के बीच कच्चे तेल की कीमतें 108 डॉलर के पार, जानें आपके पोर्टफोलियो के लिए 'खतरे की घंटी' या 'मौका'?

अगर तेल के दाम ऊंचे बने रहे, तो इन कंपनियों के मुनाफे में कमी आ सकती है, जिससे इनके शेयरों में गिरावट देखने को मिल सकती है। ऐसे में अगर आपके पोर्टफोलियो में इन सेक्टर्स के शेयर ज्यादा हैं, तो यह आपके लिए 'खतरे की घंटी' हो सकती है।

दुनिया भर के शेयर बाजारों में इस समय भारी हलचल है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य संघर्ष ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों को एक बार फिर उबाल पर ला दिया है। ताजा आंकड़ों के अनुसार, कच्चा तेल $108 प्रति बैरल के स्तर को पार कर चुका है। निवेशकों के लिए यह स्थिति दोधारी तलवार की तरह है। एक तरफ जहां यह बढ़ती महंगाई और गिरते बाजार का संकेत है, वहीं दूसरी ओर कुछ खास सेक्टर्स के लिए यह बंपर मुनाफे का अवसर भी लेकर आया है। ऐसे में हर निवेशक के मन में यह सवाल है कि इस उथल-पुथल भरे माहौल में उन्हें अपने पोर्टफोलियो के साथ क्या करना चाहिए।

crude oil prices

कच्चे तेल की कीमतों का भारतीय कंपनियों पर असर

सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि कच्चे तेल की कीमतों का सीधा असर भारतीय कंपनियों पर कैसे पड़ता है। भारत अपनी तेल की जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा आयात करता है। जब भी कच्चा तेल महंगा होता है, तो उन कंपनियों की लागत बढ़ जाती है जो कच्चे तेल को कच्चे माल (Raw Material) के तौर पर इस्तेमाल करती हैं। इनमें पेंट, टायर, लुब्रिकेंट और एयरलाइन कंपनियां प्रमुख हैं। अगर तेल के दाम ऊंचे बने रहे, तो इन कंपनियों के मुनाफे में कमी आ सकती है, जिससे इनके शेयरों में गिरावट देखने को मिल सकती है। ऐसे में यदि आपके पोर्टफोलियो में इन सेक्टर्स के शेयर ज्यादा हैं, तो यह आपके लिए 'खतरे की घंटी' हो सकती है।

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