UPI फ्री है तो कैसे पैसा कमाते हैं पेटीएम, फोनपे और गूगल पे जैसे ऐप्स?

रिपोर्ट्स के मुताबिक यूपीआई ऐप्स का FY25 में नेट रेवेन्यू 15,000 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। यूपीआई पेमेंट में तो पैसा लगता नहीं है तो ये फोन पे और पेटीएम जैसे ऐप्स कमाई कैसे करते हैं? आइए इसी सवाल का जवाब तलाशते हैं।

भारत में आज शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति होगा जिसके फोन में UPI (Unified Payments Interface) ऐप न हो। चाय की टपरी से लेकर बड़े शॉपिंग मॉल तक, हम बिना किसी एक्स्ट्रा चार्ज के चुटकियों में भुगतान कर देते हैं। हमारे लिए यह सेवा पूरी तरह मुफ्त है, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि अरबों रुपये की ये कंपनियां पेटीएम (Paytm), फोनपे (PhonePe) और गूगल पे (Google Pay) अगर हमसे कोई फीस नहीं लेतीं, तो फिर पैसा कैसे कमाती हैं? दरअसल, इनका बिजनेस मॉडल बहुत ही स्मार्ट तरीके से तैयार किया गया है, जहां हम 'ग्राहक' नहीं बल्कि इनका 'प्रोडक्ट' हैं।

UPI Payment Record

कैसे कमाई करती हैं यूपीआई ऐप्स?

इन ऐप्स की कमाई का सबसे बड़ा जरिया है 'कमीशन और बिल भुगतान'। जब आप इन ऐप्स के जरिए अपना मोबाइल रिचार्ज करते हैं, बिजली का बिल भरते हैं, डीटीएच या गैस सिलेंडर बुक करते हैं, तो ये कंपनियां संबंधित ऑपरेटर से मोटा कमीशन लेती हैं। भले ही आपको लगता हो कि आपने 500 रुपये का रिचार्ज किया और 500 ही कटे, लेकिन उस ट्रांजैक्शन के पीछे टेलीकॉम कंपनी इन ऐप्स को एक निश्चित हिस्सा देती है। इसके अलावा, अब ये ऐप्स 'प्लेटफॉर्म फीस' के नाम पर भी आपसे 1 से 2 रुपये वसूलने लगे हैं, जो करोड़ों यूजर्स के हिसाब से एक बड़ी रकम बन जाती है।

End of Feed