अगर आप सोचते हैं कि लोन लेने के मामले में केवल महाराष्ट्र या तमिलनाडु जैसे बड़े औद्योगिक राज्य ही सबसे आगे रहते हैं, तो अब आपको अपना नजरिया बदलना होगा। ट्रांसयूनियन सिबिल (TransUnion CIBIL) की ताजा रिपोर्ट ने भारतीय क्रेडिट मार्केट का एक नया और चौंकाने वाला खाका पेश किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, उत्तर प्रदेश, बिहार और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में पिछले कुछ सालों के दौरान खुदरा लोन (Retail Loans) लेने वालों की संख्या में बहुत तेजी से बढ़ोतरी हुई है। साल 2017 से 2026 के बीच के आंकड़ों को देखें तो उत्तर और मध्य भारत के राज्यों में क्रेडिट ग्रोथ की रफ्तार पश्चिम और दक्षिण भारत के विकसित राज्यों के मुकाबले कहीं ज्यादा तेज दर्ज की गई है। इस बदलाव ने देश के पूरे क्रेडिट मैप को बदल कर रख दिया है और अब छोटे शहरों तथा हिंदी भाषी राज्यों के लोग भी अपनी वित्तीय जरूरतों को पूरा करने के लिए बैंकों और एनबीएफसी (NBFCs) से लोन लेने में आगे आ रहे हैं।
यूपी-बिहार के लोग क्यों ले रहे हैं सबसे ज्यादा लोन
कितनी किस राज्य की बढ़ी हिस्सेदारी?
सिबिल रिपोर्ट के आधिकारिक डेटा पर नजर डालें तो मार्च 2017 में देश के कुल क्रेडिट मार्केट में महाराष्ट्र की हिस्सेदारी 12 प्रतिशत थी, जो मार्च 2026 में घटकर 10 प्रतिशत रह गई है। इसी तरह तमिलनाडु की हिस्सेदारी भी 11 फीसदी से घटकर 9 फीसदी पर आ गई है। इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि इन राज्यों में लोगों ने कर्ज लेना कम कर दिया है, बल्कि इसका मुख्य कारण यह है कि यूपी, बिहार और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों की हिस्सेदारी अब पहले से कहीं ज्यादा तेजी से बढ़ रही है। इस मामले में सबसे बड़ा उछाल उत्तर प्रदेश में देखा गया है, जिसकी हिस्सेदारी 8 फीसदी से बढ़कर सीधे 11 फीसदी तक पहुंच गई है। इसके अलावा मध्य प्रदेश की हिस्सेदारी 4 प्रतिशत से बढ़कर 6 प्रतिशत, बिहार की हिस्सेदारी 3 प्रतिशत से बढ़कर 5 प्रतिशत और पश्चिम बंगाल की हिस्सेदारी भी 4 प्रतिशत से बढ़कर 5 प्रतिशत हो गई है।
क्यों बढ़ रहा है लोन का चलन?
वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव भारत में वित्तीय समावेशन (Financial Inclusion) और डिजिटल बैंकिंग के तेजी से हो रहे विस्तार को दर्शाता है। अब टियर-2, टियर-3 शहरों और ग्रामीण इलाकों तक बैंकों और फिनटेक ऐप्स की पहुंच बेहद आसान हो गई है, जिससे लोग अनौपचारिक स्रोतों (जैसे स्थानीय साहूकार) के बजाय फॉर्मल बैंकिंग सिस्टम से जुड़कर लोन ले रहे हैं। टू-व्हीलर लोन, पर्सनल लोन, कंज्यूमर ड्यूरेबल लोन और स्मॉल बिजनेस लोन की बढ़ती मांग के कारण यूपी, बिहार और एमपी जैसे राज्य अब देश के लोन मार्केट के नए ग्रोथ इंजन बनकर उभर रहे हैं। भले ही महाराष्ट्र और तमिलनाडु आज भी बाजार के आकार में आगे हों, लेकिन उत्तर और मध्य भारत के राज्यों का यह ट्रेंड दिखाता है कि आने वाले समय में देश का क्रेडिट मार्केट और भी ज्यादा संतुलित और व्यापक होने वाला है।
