Share Market में सीधे निवेश के जोखिम से बचकर म्यूचुअल फंड के निवेश को सुरक्षित मानने वाले लोगों को पिछले 3 सप्ताह में नई सच्चाई का सामना करना पड़ा है। असल में पश्चिम एशिया में अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी युद्ध के बीच जहां दुनियाभर के शेयर बाजारों में बड़ी गिरावट आई है। वहीं, इक्विटी सेगमेंट के तमाम म्यूचुअल फंड्स में बड़ी गिरावट देखने को मिली है। 26 फरवरी से 20 मार्च के दौरान इन म्यूचुअल फंड्स ने 17% तक की गिरावट देखी है।
युद्ध के बाद से इन फंड्स में आई तबाही
वेल्थ क्रिएटर क्यों बने डेस्ट्रॉयर?
आमतौर पर म्यूचुअल फंड को वेल्थ क्रिएटर माना जाता है। लेकिन, फरवरी के अंत से अब तक ये म्यूचुअल फंड वेल्थ डेस्ट्रॉयर साबित हुए हैं। सिर्फ 3 हफ्तों में 5 फंड्स ने 14% से 17% तक की गिरावट दर्ज की। असल में म्यूचुअल फंड्स का जितना ज्यादा एक्सपोजर इक्विटी यानी शेयरों में होता है, उतना ही असर शेयर बाजार की हलचल का इन पर दिखता है। पिछले तीन सप्ताह में शेयर बाजार में ईरान युद्ध, FII की भगदड़ और सेक्टोरल रोटेशन की वजह से भारी कमजोरी देखने को मिली है। यही वजह है कि इक्विटी सेगमेंट के म्यूचुअल फंड्स में इतनी गिरावट आई है।
| फंड का नाम | कैटेगरी | 3 हफ्ते में गिरावट | 1 साल रिटर्न |
|---|---|---|---|
| DSP World Gold Mining FoF | International | -16.84% | +115.68% |
| SBI BSE PSU Bank ETF | PSU Banking | -15.06% | New Fund |
| SBI BSE PSU Bank Index | PSU Banking | -15.04% | New Fund |
| HDFC Nifty PSU Bank ETF | PSU Banking | -14.89% | +40.15% |
| Tata Nifty Auto Index | Auto | -14.61% | +15.30% |
सबसे बड़ा लूजर
युद्ध शुरू होने के बाद से दौलत गंवाने वाले इक्विटी फंड्स की लिस्ट में सबसे ऊपर है DSP World Gold Mining Overseas Equity FoF है। इसने जिसने 3 हफ्तों में निवेशकों की पूंजी को 16.84% तक घटाा दिया है। यह एक इंटरनेशनल फंड है, जो ग्लोबल गोल्ड माइनिंग कंपनियों में निवेश करता है। Gold की कीमतें बढ़ने के बावजूद माइनिंग कंपनियों के के शेयर गिरे हैं, क्योंकि ईरान संकट में एनर्जी कॉस्ट बढ़ने से माइनिंग का खर्च बढ़ गया है।
सरकारी बैंकों ने दिया झटका
इक्विटी फंड्स में दूसरा सबसे बड़ा झटका PSU Banking funds ने दिया है। SBI BSE PSU Bank ETF ने इस दौरान 15.06% का नेगेटिव रिटर्न दिया है। वहीं, SBI BSE PSU Bank Index ने 15.04%, HDFC Nifty PSU Bank ETF ने 14.89% तक का नेगेटिव रिटर्न दिया है। ये तीनों एक ही कैटेगरी के फंड हैं। क्रूड ऑयल के बढ़ते दाम की वजह से महंगाई बढ़ने की आशंका है। इसके चलते RBI Rate Cut सायकल रुकने का डर है। इसकी वजह से इन स्टॉक्स में गिरावट आई, जिसका सीधा असर म्यूचुअल फंड्स पर हुआ।
ऑटो सेक्टर पर दोहरी मार
एक तरफ जहां शेयर बाजार में निफ्टी ऑटो इंडेक्स में पिछले एक महीने में 12 फीसदी की गिरावट आई है। वहीं, Tata Nifty Auto Index फंड में करीब 14.61% की गिरावट दर्ज की गई है। Auto sector पर दो तरफ से मार पड़ी है। पहली, क्रूड महंगा महंगा होने से ईंधन की कीमत बढ़ने से व्हीकल की डिमांड घट सकती है। वहीं, दूसरी तरफ कच्चे माल की कीमतें बढ़ने से मार्जिन पर दबाव बढ़ने का खतरा है।
क्या यह सिर्फ शॉर्ट टर्म झटका?
यहां सिर्फ 3 स्प्ताह के डाटा के आधार पर बताया गया है, ताकि युद्ध का असर इन फंड्स पर पता चले। हालांकि, 1 साल के टाइम फ्रेम पर इन सभी फंड्स का रिटर्न पॉजिटिव है। इससे यह भी पता चलता है कि युद्ध की स्थिति खत्म होने के बाद इन फंड्स की स्थिति भी सुधर सकती है। लिहाजा, इस गिरावट को लॉन्गटर्म नहीं माना जा सकता है।
क्या करें निवेशक?
अगर आपके पास इनमें से कोई fund है तो तीन बातें याद रखें। पहली, SIP बंद नहीं करें, क्योंकि गिरावट में NAV घटने की वजह से ज्यादा यूनिट मिलती हैं। दूसरी, सेक्टोरल और थेमेटिक फंड्स में वोलैटिलिटी ज्यादा रहती है। लिहाजा, जब रिकवरी होगी, तब वह भी तेज होगी। तीसरी, अगर निवेश का लक्ष्य 3 साल से ज्यादा है, तो इन्हें होल्ड करें क्योंकि PSU Banks और Auto दोनों सायक्लिक सेक्टर हैं, जो समय-समय पर रिकवरी करते हैं। 3 हफ्तों में 15% की गिरावट दर्दनाक है। लेकिन, इक्विटी सेक्टोरल फंड्स में में यह असामान्य नहीं है।
डिस्क्लेमर: TIMES NOW नवभारत किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ या कमोडिटी में निवेश की सलाह नहीं देता है। यहां पर केवल जानकारी दी गई है। निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें।
