Ticket Cancellation Charges: भारतीय रेलवे से रोजाना करोड़ों यात्री सफर करते हैं, जिससे रेलवे की खूब कमाई होती है। लेकिन क्या आप जानते हैं रेलवे सिर्फ टिकट बेचकर ही नहीं बल्कि कैंसिल हुए टिकट से भी बंपर कमाई करता है? आपको जानकर हैरानी होगी कि रेलवे (Indian Railway) ने टिकट कैंसिलेशन से कितनी कमाई कर डाली है। दरअसल, टिकट कैंसिल कराते समय रेलवे कुछ चार्ज काटता है, जिससे उसकी कमाई होती है। संसद के मानसून सत्र के दौरान रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने टिकट कैंसिलेशन चार्जेज से होने वाली रेलवे की आय और रिफंड नियमों पर विस्तार से प्रकाश डाला। रेल मंत्री ने बताया कि टिकट रद्द कराने पर लगने वाले शुल्क पूरी तरह से पारदर्शी व्यवस्था के तहत तय किए जाते हैं और इनका मुख्य उद्देश्य सीटों के दुरुपयोग को रोकना है।
Ticket Cancellation Charges: टिकट कैंसिलेशन से रेलवे को कितनी हुई कमाई?
रेलवे की आय का एक बड़ा हिस्सा उन यात्रियों के टिकट रद्द करने के बाद लगने वाले कैंसिलेशन चार्ज से आता है जो अंतिम समय में अपनी यात्रा रद्द करते हैं। इससे न केवल रेलवे को प्रशासनिक और सीट आवंटन लागत की भरपाई में मदद मिलती है, बल्कि खाली हुई सीटों को RAC या वेटिंग लिस्ट वाले अन्य यात्रियों को आवंटित करने का मौका भी मिलता है।
कितनी हुई कमाई?
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने स्पष्ट किया कि रेल टिकट रद्द कराने और ऑनलाइन वेटिंग टिकट खुद-ब-खुद (ऑटो-कैंसिल) होने से होने वाली आय का जोन-वाइज अलग से कोई डेटा दर्ज नहीं किया जाता है। यानी उत्तर, पूर्व या पश्चिम रेलवे जैसे अलग-अलग रेलवे जोनों के आधार पर इस कमाई का अलग हिसाब नहीं रखा जाता, जिसके चलते सरकार के पास यह आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं कि किस जोन ने कैंसिलेशन से कितना राजस्व जुटाया है। हालांकि, जोन-वार आंकड़े उपलब्ध न होने के बावजूद रेल मंत्री ने संसद के सामने सामान्य और प्रीमियम ट्रेनों के टिकट कैंसिलेशन से जुड़े सभी नियम विस्तार से प्रस्तुत किए।किन ट्रेनों से कितनी हुई कमाई?
संसद में जानकारी देते हुए रेल मंत्री ने स्पष्ट किया कि प्रीमियम और आधुनिक ट्रेनों जैसे वंदे भारत एक्सप्रेस और अमृत भारत एक्सप्रेस के लिए कैंसिलेशन और रिफंड के नियम सामान्य एक्सप्रेस और मेल ट्रेनों की तुलना में थोड़े अलग और सख्त हैं। सामान्य ट्रेनों में अगर आप अपना कन्फर्म टिकट ट्रेन के निर्धारित प्रस्थान समय से 48 घंटे पहले रद्द करते हैं, तो श्रेणी के अनुसार एक निश्चित फ्लैट शुल्क काटा जाता है। इसमें प्रथम एसी और एग्जीक्यूटिव क्लास के लिए 240 रुपये, द्वितीय एसी और फर्स्ट क्लास के लिए 200 रुपये, थर्ड एसी, एसी चेयर कार व 3E इकोनॉमी के लिए 180 रुपये, स्लीपर क्लास के लिए 120 रुपये और सेकेंड सिटिंग (2S) के लिए 60 रुपये कटते हैं।
अगर टिकट ट्रेन छूटने के 48 घंटे से लेकर 12 घंटे पहले रद्द किया जाता है, तो कुल किराये का 25 प्रतिशत (न्यूनतम शुल्क के साथ) काट लिया जाता है। वहीं 12 घंटे से लेकर 4 घंटे पहले तक टिकट कैंसिल कराने पर 50 प्रतिशत किराये की कटौती होती है। ट्रेन छूटने में 4 घंटे से कम समय रहने पर कन्फर्म टिकट रद्द कराने पर कोई रिफंड नहीं मिलता है। इसके अलावा, वेटिंग या आंशिक रूप से कन्फर्म (Partial) टिकट को ट्रेन छूटने के 30 मिनट पहले तक रद्द कराया जा सकता है, जिस पर 60 रुपये प्रति यात्री क्लर्केज चार्ज काटकर बाकी रकम वापस मिल जाती है।
वंदे भारत स्लीपर और अमृत भारत एक्सप्रेस के नए नियम
वंदे भारत स्लीपर और अमृत भारत एक्सप्रेस जैसी प्रीमियम ट्रेनों में कन्फर्म टिकट रद्द कराने के लिए अधिक सख्त नियम तय किए गए हैं। इन ट्रेनों में अगर आप ट्रेन रवाना होने से कम से कम 72 घंटे (3 दिन) पहले अपना टिकट रद्द करते हैं, तो किराये का 25 प्रतिशत हिस्सा काटा जाएगा। वहीं 72 घंटे से लेकर 8 घंटे पहले तक टिकट कैंसिल कराने की स्थिति में 50 प्रतिशत किराया जब्त हो जाता है। अगर ट्रेन छूटने में 8 घंटे से भी कम समय बचा है और आप कन्फर्म टिकट रद्द करते हैं, तो कोई रिफंड नहीं दिया जाएगा। हालांकि, राहत की बात यह है कि इन ट्रेनों में भी वेटिंग लिस्ट और आंशिक रूप से कन्फर्म टिकटों को रद्द करने की समय सीमा और लगने वाले कैंसिलेशन चार्जेज (क्लर्केज शुल्क) में कोई बदलाव नहीं किया गया है, वे सामान्य ट्रेनों की तरह ही लागू रहेंगे।
