मोदी सरकार के लिए चुनौती बनेंगे ये नंबर, दिवाली से पहले बढ़ी परेशानी

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  • Updated Oct 7, 2022, 08:18 PM IST

Indian Economy Challenge :तेल निर्यातक देशों के संगठन ओपेक और उसके सहयोगियों (OPEC+)ने कच्चे तेल की घटती कीमतों को देखते हुए, उत्पादन में प्रतिदिन 20 लाख बैरल की कटौती करने का फैसला किया है। यह कटौती एक नवंबर से लागू होगी। जिसका सीधा असर महंगाई पर पड़ेगा। जो मोदी सरकार के लिए नई चुनौती है।

KEY HIGHLIGHTS
  • विश्व बैंक ने भारत की GDP ग्रोथ रेट के अनुमान में एक फीसदी की कटौती कर दी है।
  • सर्विस सेक्टर 6 महीने के निचले स्तर पर आ गया है।
  • ओपेक प्लस देशों के फैसले से पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर राहत मिलने की कम उम्मीद ।

Indian Economy Challenge : दिवाली नजदीक है, उम्मीद थी कि त्योहारों पर महंगाई (Inflation)से राहत मिलेगी, और लोगों के जेब में ज्यादा पैसा आएगा। लेकिन ऐसा होते नहीं दिख रहा है। इसकी सबसे ताजा वजह कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों पर ओपेक प्लस (OPEC +) देशों का फैसला है। जिसमें उन्होंने तेल उत्पादन में कटौती का फैसला कर दिया है। ऐसे में पहले से ही मंदी की आशंका से बिगड़े वैश्विक माहौल में ओपेक प्लस का फैसला और महंगाई बढ़ाएगा। इसी तरह सितंबर महीने में भारतीय सर्विस सेक्टर (PMI) का आंकड़ा भी उम्मीदों भरा नहीं रहा है। इसके बाद विश्व बैंक (World Bank) की ताजा रिपोर्ट ने रही सही कसर पूरी कर दी है। उसने भारत की ग्रोथ रेट (GDP Growth Rate) का अनुमान एक फीसदी घटा दिया है।

Narendra Modi And Nirmala Sitharaman

फाइल फोटो: पीएम नरेंद्र मोदी और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण

ओपेक प्लस देशों के फैसले से पेट्रोल-डीजल पर राहत नहीं

तेल निर्यातक देशों के संगठन ओपेक और उसके सहयोगियों (OPEC+)ने कच्चे तेल की घटती कीमतों को देखते हुए, उत्पादन में प्रतिदिन 20 लाख बैरल की कटौती करने का फैसला किया है। यह कटौती एक नवंबर से लागू होगी। असल में पिछले हफ्ते कच्चे तेल की कीमतें गिरकर अंतरराष्ट्रीय बाजार में 82 डॉलर प्रति डॉलर तक आ गई थी। जबकि जून 2022 में यह 123 डॉलर प्रति बैरल था। इसे देखते हुए देशों ने कटौती का फैसला किया है। कटौती के फैसले के बाद से ही कीमतों पर असर दिखने लगा है और शुक्रवार को 96 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया है। ऐसे में जब भारत 80 फीसदी पेट्रोलियम उत्पादों का आयात करता है, तो उसके लिए इन परिस्थितियों में कीमतों में कटौती करना मुश्किल होगा। और उसका सीधा असर महंगाई पर पड़ेगा।

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