Market Mood and Stock Analysis : बेंजामिन ग्राहम (Benjamin Graham) की मशहूर किताब The Intelligent Investor को निवेश की दुनिया की सबसे अहम किताबों में गिना जाता है। इसमें निवेश को सिर्फ शेयर की कीमत ऊपर जाने की उम्मीद के तौर पर नहीं, बल्कि किसी बिजनेस में हिस्सेदारी खरीदने की तरह समझने पर जोर दिया गया है।
इंटेलिजेंट इन्वेस्टर ग्राहम की सबसे मशहूर किताब है
जब बाजार तेजी से ऊपर-नीचे हो रहा हो, हर दिन नई खबरें शेयरों को प्रभावित कर रही हों और आसपास के लोग जल्दी पैसा बनाने के तरीके बता रहे हों, तब Graham की सोच निवेशक को थोड़ा रुककर सोचने की सलाह देती है। उनकी किताब की कई बातों को रोजमर्रा की जिंदगी के उदाहरणों से आसानी से समझा जा सकता है। आइए जानते हैं ऐसे ही 5 आसान मनी लेसन, जो निवेश के दौरान काफी काम आ सकते हैं।
1. सिर्फ बढ़ती कीमत न देखें, बिजनेस समझें
किसी शेयर की कीमत बढ़ रही है, इसका मतलब यह जरूरी नहीं कि वह निवेश के लिए अच्छा विकल्प है। ग्राहम के मुताबिक सबसे पहले उस कंपनी के बिजनेस को समझना जरूरी है। इसे ऐसे समझिए कि अगर आपको किसी मोहल्ले की दुकान खरीदनी हो तो क्या आप सिर्फ यह देखकर पैसा लगा देंगे कि पिछले कुछ दिनों में उसकी कीमत बढ़ रही है? शायद नहीं। आप यह जानना चाहेंगे कि दुकान कितना कमा रही है, उस पर कितना कर्ज है, ग्राहक कितने हैं और आने वाले समय में उसका कारोबार कैसा रह सकता है। शेयर खरीदते समय भी यही सोच लागू होती है।
2. बाजार के मूड से नहीं करें फैसला
बेंजामिन ग्राहम की सबसे मशहूर अवधारणाओं में से एक है Mr Market ने बाजार को एक ऐसे काल्पनिक बिजनेस पार्टनर की तरह समझाया, जो हर दिन अलग मूड में आपके पास आता है। कभी वह बहुत उत्साहित होकर आपके निवेश की बहुत ऊंची कीमत बताता है और कभी डरकर बेहद कम कीमत लगाने लगता है। असल जिंदगी में भी ऐसा ही होता है। किसी शेयर की कीमत गिरने का मतलब यह जरूरी नहीं कि कंपनी का बिजनेस अचानक खराब हो गया है। उसी तरह किसी शेयर का भाव तेजी से बढ़ रहा है तो इसका यह मतलब भी नहीं कि कंपनी की असली स्थिति उतनी ही तेजी से सुधर गई है। इसलिए कीमत को आदेश की तरह देखने के बजाय उसे एक ऑफर की तरह देखना चाहिए। फैसला कंपनी के बिजनेस को देखकर लेना ज्यादा महत्वपूर्ण है।
3. गलती की गुंजाइश हमेशा रखिए
ग्राहम का एक और अहम विचार है Margin of Safety, यानी निवेश करते समय अपनी गणना में गलती की गुंजाइश रखना है। मान लीजिए आपकी रिसर्च के मुताबिक किसी कंपनी के एक शेयर की अनुमानित कीमत ₹100 है। ऐसे में अगर आप उसे ₹70 पर खरीदते हैं, तो आपके पास ₹98 की कीमत पर खरीदने की तुलना में ज्यादा गुंजाइश रहती है। लेकिन, इसका मतलब यह नहीं है कि हर शेयर को किसी तय डिस्काउंट पर खरीदना चाहिए। आपकी कंपनी को लेकर की गई गणना गलत भी हो सकती है। कारोबारी स्थिति बदल सकती है और शेयर में नुकसान भी हो सकता है।
इसलिए केवल कम कीमत देखकर किसी कमजोर बिजनेस को अच्छा निवेश मान लेना भी सही रणनीति नहीं है।
4. पूरा पैसा एक ही कंपनी पर नहीं लगाएं
निवेश में अच्छी कंपनी चुनना जरूरी है, लेकिन किसी एक कंपनी पर पूरी तरह निर्भर रहना भी जोखिम पैदा कर सकता है। कोई मजबूत दिखने वाला कारोबार भी अचानक ऐसी समस्या का सामना कर सकता है जिसकी पहले उम्मीद नहीं थी। इसे खेती के उदाहरण से समझ सकते हैं। अगर किसान अपनी पूरी जमीन पर सिर्फ एक ही फसल उगाए और वही फसल खराब हो जाए, तो उसका पूरा उत्पादन प्रभावित हो सकता है। अलग-अलग फसलें होने पर एक फसल के खराब होने का असर कुछ कम किया जा सकता है। निवेश में भी अलग-अलग कंपनियों या निवेशों में पैसा फैलाने से किसी एक कंपनी के जोखिम पर निर्भरता कम हो सकती है। हालांकि, सिर्फ कई शेयर खरीद लेना ही पर्याप्त डायवर्सिफिकेशन नहीं है। अगर सभी कंपनियां एक ही सेक्टर में हैं, तो पूरे सेक्टर में आई समस्या कई निवेशों को एक साथ प्रभावित कर सकती है।
5. वही निवेश रणनीति चुनिए जिसे लंबे समय तक निभा सकें
ग्राहम यह भी बताते हैं कि हर निवेशक का तरीका एक जैसा नहीं होना चाहिए। कुछ लोग कंपनियों पर गहराई से रिसर्च कर सकते हैं, जबकि कुछ निवेशक सरल और कम समय लेने वाला तरीका पसंद कर सकते हैं। सबसे जरूरी बात यह है कि आपकी रणनीति आपके समय, जानकारी और जोखिम लेने की क्षमता के मुताबिक हो। सिर्फ इसलिए किसी दूसरे निवेशक की रणनीति कॉपी करना जरूरी नहीं है, क्योंकि वह बहुत सफल या आकर्षक दिख रही है। बाजार में लगातार खरीद-बिक्री करना ही सक्रिय निवेश का मतलब नहीं है। एक ऐसी व्यवस्था ज्यादा महत्वपूर्ण हो सकती है जिसे आप समझते हों और लंबे समय तक अनुशासन के साथ निभा सकें।
