घर किराये पर लेने से पहले जरूर पढ़ें; मकान मालिक क्या कर सकता है और क्या नहीं?

नया घर किराए पर लेते समय मकान मालिक की शर्तों और दखलअंदाजी से परेशान होने से बचना चाहते हैं, तो जान लीजिए मकान मालिक क्या कर सकता है और क्या नहीं?

भारत के बड़े शहरों में पढ़ाई या नौकरी के सिलसिले में रहने वाले लाखों लोगों के लिए घर किराए पर लेना एक आम प्रक्रिया है। लेकिन अक्सर यह देखा गया है कि किराएदार और मकान मालिक के बीच अधिकारों को लेकर हमेशा असमंजस की स्थिति बनी रहती है। कई बार मकान मालिक बिना बताए घर में घुस आते हैं या अचानक किराया बढ़ा देते हैं, जिससे किराएदार मानसिक रूप से परेशान होते हैं। इस तरह के विवादों और इनकम टैक्स या कानूनी नोटिस से बचने के लिए दोनों पक्षों को अपने अधिकारों का पता होना चाहिए।

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मकान मालिक के पास क्या हैं अधिकार?

सबसे पहले यह जानना जरूरी है कि मकान मालिक के पास क्या अधिकार हैं यानी वह क्या कर सकता है। मकान मालिक को समय पर किराया पाने का पूरा अधिकार है और यदि किराएदार लगातार किराया देने में चूक करता है, तो वह कानूनी प्रक्रिया के तहत घर खाली करवा सकता है। इसके अलावा, यदि किराएदार घर की संपत्ति को कोई नुकसान पहुँचाता है, तो मकान मालिक उसकी मरम्मत का खर्च किराएदार से वसूल सकता है या सिक्योरिटी मनी से काट सकता है। मकान मालिक रेंट एग्रीमेंट में इस बात की शर्त भी रख सकता है कि घर का इस्तेमाल सिर्फ रहने के लिए होगा, न कि किसी कमर्शियल या व्यावसायिक काम के लिए। रेंट एग्रीमेंट की अवधि खत्म होने पर वह कानून के मुताबिक किराया बढ़ाने या नया एग्रीमेंट करने की मांग भी पूरी तरह कर सकता है।

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