Gold Jewelry : पश्चिम एशिया के प्रमुख आभूषण आयातकों में से एक, दुबई स्थित बाफलेह ज्वैलरी, अब हल्के डिजाइन और कम कैरेट वाले सोने की ओर रुख कर रही है। इसका कारण सोने की तेजी से बढ़ती कीमतें हैं, जिनकी वजह से प्रमुख बाजारों में मांग में गिरावट आई है। कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर रमेश वोरा के अनुसार, चालू वित्त वर्ष के पहले आठ महीनों में भारत से 600-700 किलोग्राम आभूषण आयात किए गए हैं, जबकि पिछले पूरे वर्ष में यह संख्या 1.2 टन थी। सोने की कीमतें तीन महीनों के भीतर करीब 2,200-2,500 डॉलर प्रति औंस से बढ़कर 3,600 डॉलर प्रति औंस हो गई हैं, जिससे मात्रा में 20-30 प्रतिशत की गिरावट आई है। दुबई के टॉप भारतीय आभूषण आयातक ने कारोबार में 30 प्रतिशत की कटौती की।
सोने के दामों में तेजी से दुबई के भारतीय ज्वेलरी कारोबार को बड़ा झटका (तस्वीर-istock)
सोने की बढ़ती कीमतें चुनौती
न्यूज एजेंसी भाषा के मुताबिक वोरा ने सऊदी अरब आभूषण प्रदर्शनी (एसएजेएक्स) में बताया कि लोग अब सोने की इतनी महंगी कीमतों को वहन नहीं कर पा रहे हैं। उनका मानना है कि सोने की कीमतें 4,000 अमेरिकी डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकती हैं।
नई रणनीति: 14 कैरेट आभूषण
कंपनी अगले महीने 14 कैरेट के आभूषण पेश करने की योजना बना रही है। इसके लिए कोलकाता और दिल्ली के आपूर्तिकर्ताओं के साथ मिलकर काम किया जा रहा है ताकि सोने की मात्रा कम करने के बावजूद रंग और गुणवत्ता बनी रहे।
अस्थिर बाजार में चुनौतियां
सोने की कीमतों में प्रतिदिन 50 डॉलर तक का उतार-चढ़ाव होने के कारण, आयातकों को व्यापक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। बाफलेह ज्वैलरी को भारत के साथ दुबई के विशेष आयात संवर्धन प्राधिकरण (एसआईपीए) के तहत शुल्क मुक्त आयात का लाभ मिलता है, लेकिन फिर भी बढ़ती लागत ने व्यापार को 30-40 प्रतिशत तक कम कर दिया है।
भारतीय कारीगरी की प्रशंसा
रमेश वोरा ने भारतीय आभूषणों की तुलना इटली, तुर्किये, सिंगापुर और इंडोनेशिया के मशीन-निर्मित आभूषणों से करते हुए कहा कि भारतीय आभूषण पूरी तरह हाथ से बने होते हैं और उनकी कोई तुलना नहीं कर सकता। उन्होंने कहा कि भारतीय आभूषण अब भी दुनिया में पहली पसंद हैं और कोई भी उनका मुकाबला नहीं कर सकता।
