Supreme Court on Lottery Tax: मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र की अपील को खारिज करते हुए यह फैसला दिया कि लॉटरी वितरकों को केंद्र सरकार को सर्विस टैक्स का भुगतान नहीं करना होगा। कोर्ट ने सिक्किम हाई कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा।
सुप्रीम कोर्ट ने लॉटरी वितरकों पर सर्विस टैक्स लगाने की केंद्र की अपील को खारिज किया।
न्यायमूर्ति बीवी नागरथना और एनके सिंह की पीठ ने कहा कि लॉटरी वितरकों के बीच कोई एजेंसी नहीं है, इसलिए वे सर्विस टैक्स के लिए जिम्मेदार नहीं हैं। हालांकि, यह भी स्पष्ट किया गया कि लॉटरी पर राज्य सरकार द्वारा लगाया गया जुआ कर (Gambling Tax) जारी रहेगा।
कहां नहीं लागू होगा सर्विस टैक्स
पीठ ने आगे कहा, "सर्विस टैक्स उन लेनदेन पर लागू नहीं होगा जो लॉटरी टिकटों के खरीदार और फर्म के बीच होते हैं... उक्त चर्चा को ध्यान में रखते हुए, हम पाते हैं कि भारत सरकार और अन्य द्वारा दायर अपीलों में कोई merit नहीं है। इसलिए, इन अपीलों को खारिज किया जाता है।"
राज्य सरकार को ही लॉटरी पर कर लगाने का अधिकार
सुप्रीम कोर्ट ने सिक्किम हाई कोर्ट के फैसले को सही ठहराते हुए कहा कि लॉटरी पर कर लगाने का अधिकार केवल राज्य सरकार के पास है, केंद्र के पास नहीं।
केंद्र ने अपनी अपील में यह तर्क दिया था कि उसे सर्विस टैक्स लगाने का अधिकार है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने उच्च न्यायालय की इस बात से सहमति जताई कि लॉटरी "बेटिंग और जुआ" के तहत आती है और जैसा कि संविधान के सूची-II के अनुच्छेद 62 में उल्लेखित है इसे राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र में रखा गया है। केंद्र ने 2013 में यह अपील उस समय की थी जब लॉटरी फर्म, फ्यूचर गेमिंग सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड ने इस मुद्दे को लेकर याचिका दायर की थी।
