उम्र महज एक नंबर है! यह लाइन हम अक्सर सुनते हैं, लेकिन इसे असल जिंदगी में सच कर दिखाने वाले लोग बहुत कम होते हैं। आज हम बात कर रहे हैं एक ऐसे ही शख्स की, जिन्होंने रिटायरमेंट की उम्र के बाद बिजनेस की दुनिया में कदम रखा और आज 45,600 करोड़ (5.5 अरब डॉलर) करोड़ रुपये का विशाल साम्राज्य खड़ा कर दिया।
लछमन दास मित्तल
यह प्रेरणादायक कहानी है सोनालीका ट्रैक्टर्स (Sonalika Tractors) के संस्थापक लछमन दास मित्तल की। जहां 60 साल की उम्र पार करने के बाद ज्यादातर लोग आरामदेह और शांत जिंदगी की प्लानिंग करने लगते हैं, वहीं मित्तल साहब ने अपने जीवन की नई और सबसे बड़ी पारी की शुरुआत की। आज 95 साल की उम्र में लछमन दास मित्तल भारत के सबसे उम्रदराज अरबपति हैं। उनके नेतृत्व में सोनालीका ट्रैक्टर्स आज एक ऐसा बड़ा ब्रांड बन चुका है, जो न सिर्फ भारत बल्कि दुनिया के कई देशों में किसानों की पहली पसंद है और उनकी तरक्की का मुख्य जरिया बना हुआ है।
पंजाब के एक छोटे से गांव में जन्म
लछमन दास मित्तल का जनम 1931 में पंजाब के होशियारपुर के एक छोटे से गांव में हुआ था। एक साधारण परिवार में पले-बढ़े होने के बावजूद, उन्होंने ज्ञान को सबसे ज्यादा महत्व दिया। उन्होंने कड़ी मेहनत की और अंग्रेजी और उर्दू में मास्टर डिग्री हासिल की। अपनी काबिलियत के लिए उन्होंने गोल्ड मेडल भी जीता।
LIC एजेंट के तौर पर कैरियर की शुरुआत
1955 में, उन्होंने LIC (लाइफ इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन) में एक एजेंट के तौर पर काम शुरू किया। उन्होंने 35 साल तक इंश्योरेंस पॉलिसी बेचीं। यह एक स्थिर नौकरी थी। इससे घर का खर्च चल जाता था। लेकिन मित्तल के मन में कुछ ऐसा करने की इच्छा थी जिसे 9 से 5 की नौकरी से पूरा नहीं किया जा सकता था। वह अपना खुद का कुछ बनाना चाहते थे।
पहला बिजनेस फेल हुआ और दिवालिया हुए
1970 में, LIC में काम करते हुए ही उन्होंने बिजनेस में हाथ आजमाया। उन्होंने पंजाब में गेहूं के थ्रेशर बनाने का काम शुरू करने के लिए 20,000 रुपये लगाए। उन्होंने स्थानीय लोहारों के साथ मिलकर काम किया और किसानों को बेहतर औजार देने की कोशिश की। यह काम सफल नहीं हुआ। एक साल के अंदर ही वे दिवालिया हो गए। बिजनेस फेल हो गया और उनके पैसे डूब गए। कई लोगों के लिए यह उनके सपने का अंत होता, लेकिन मित्तल ने हार नहीं मानी और वापस इंश्योरेंस बेचने लगे। उन्होंने इसे हार नहीं, बल्कि एक सबक माना। उन्होंने इंतजार किया, सीखा और प्लानिंग की।
1990 में रिटायर होने के बाद सफल
1990 में लक्ष्मण दास मित्तल LIC से रिटायर हुए। तब तक वे कॉर्पोरेशन को अपनी जिंदगी के साढ़े तीन दशक दे चुके थे। समाज को उम्मीद थी कि वे अब आराम से रहेंगे, लेकिन उन्होंने कमर कस ली। जिस उम्र में ज्यादातर लोग पेंशन प्लान की चिंता करते हैं, उस उम्र में मित्तल मैन्युफैक्चरिंग प्लांट के बारे में सोच रहे थे। 1995 में, 64 साल की उम्र में उन्होंने सोनालीका ट्रैक्टर्स की शुरुआत की। उन्होंने मार्केट में एक कमी देखी थी। भारतीय किसानों को ऐसे भरोसेमंद और सस्ते ट्रैक्टर चाहिए थे जो स्थानीय मिट्टी के हिसाब से हों। उन्हें सिर्फ मशीनें नहीं, बल्कि अपनी आजीविका में साथ देने वाले साथी चाहिए थे। हिम्मत, पक्के इरादे और पिछली नाकामी से मिली समझ के साथ मित्तल ने काम शुरू किया। एक साल के अंदर ही सोनालीका के ट्रैक्टर बनने लगे। आम किसान की जरूरतों को सबसे बेहतर तरीके से समझने की वजह से कंपनी तेजी से बढ़ी। मित्तल सिर्फ़ पंजाब में ट्रैक्टर बेचने तक ही सीमित नहीं रहे। उनका एक विजन था। वे जानते थे कि अगर उनकी मशीनें भारत के मुश्किल खेतों में काम कर सकती हैं, तो वे कहीं भी काम कर सकती हैं। उन्होंने क्वालिटी, इनोवेशन और भरोसे पर ध्यान दिया। जल्द ही, सोनालीका भारत की तीसरी सबसे बड़ी ट्रैक्टर बनाने वाली कंपनी बन गई।
सोनालीका ग्रुप ग्लोबल एम्पायर बन चुका है
लछमन दास मित्तल द्वारा शुरू किया गया सोनालिका ग्रुप आज एक ग्लोबल एम्पायर बन चुका है। सोनालीका ग्रुप की मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स अब दुनिया भर में फैली हुई हैं और कंपनी 150 से ज्यादा देशों में एक्सपोर्ट करती है। एक साल में कंपनी 1,50,000 से ज्यादा ट्रैक्टर बेचती है। आज भी, 95 साल की उम्र में मित्तल खाली नहीं बैठे हैं। वे अब भी ऑफिस जाते हैं। उनके लिए काम कोई बोझ नहीं है, बल्कि यही उन्हें जिंदा रखता है। उन्हें भारत के कई बड़े सम्मान और पुरस्कार मिले हैं। फोर्ब्स के अनुसार उनकी कुल संपत्ति 5.5 अरब डॉलर से ज्यादा है, जिससे वे भारत के सबसे अमीर लोगों में से एक बन गए हैं।
