Stock Market Rules Change From 1 October: इस समय घरेलू शेयर बाजार लगातार नई ऊंचाइयों को छू रहा है। इस बीच मंगलवार 1 अक्टूबर से शेयर बाजार से जुड़े कई बदलाव लागू होने जा रहे हैं। इन बदलावों में ब्रोकर्स के लिए एक समान लेनदेन शुल्क (Uniform Transaction Fees), नया बायबैक स्ट्रक्चर, डेरिवेटिव ट्रेड्स पर हाई टैक्स और बोनस इश्यू का तेजी से कारोबार शामिल हैं। आगे जानिए क्या होगा इन बदलावों का असर।
1 अक्टूबर से शेयर बाज़ार के नियम बदल जाएंगे
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ब्रोकर्स के लिए एक समान लेनदेन शुल्क
शुक्रवार को एनएसई और बीएसई की तरफ से घोषित किए गए नए लेनदेन शुल्क 1 अक्टूबर मंगलवार से लागू होंगे। एनएसई ने जहां कैश एंड डेरिवेटिव सेगमेंट के लिए नया फीस स्ट्रक्चर पेश की, वहीं बीएसई ने इक्विटी डेरिवेटिव सेगमेंट के सेंसेक्स और बैंकेक्स ऑप्शन कॉन्ट्रैक्ट्स के लिए बदलावों की घोषणा की।
कैश मार्केट में NSE प्रति लाख कारोबार ट्रेडेड वैल्यू पर प्रत्येक पक्ष पर 2.97 रुपये का लेनदेन शुल्क लगाएगा, जबकि इक्विटी वायदा में, यह प्रति लाख ट्रेडेड वैल्यू पर प्रत्येक पक्ष पर 1.73 रुपये होगा।
नया शेयर बायबैक टैक्सैशन
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने घोषणा की कि 1 अक्टूबर से शेयर बायबैक से होने वाली इनकम पर डिविडेंड के रूप में टैक्स लगाया जाएगा, जिसका मतलब है कि शेयरधारक अपने आयकर ब्रैकेट के आधार पर टैक्स का भुगतान करेंगे।
इस बदलाव का मकसद टैक्स का बोझ कंपनियों से शेयरधारकों पर डालना है, जिससे कंपनियों को अपने फंड का उपयोग अन्य उद्देश्यों के लिए करने की सुविधा मिलती है।
ऑप्शंस कॉन्ट्रैक्ट्स पर एसटीटी
इस साल की शुरुआत में, वित्त मंत्री सीतारमण ने घोषणा की थी कि वायदा और विकल्प (F&O) ट्रेड पर सिक्योरिटी ट्रांजेक्शन टैक्स (STT) 1 अक्टूबर से बढ़ेगा। नए नियमों के तहत, फ्यूचर ऑप्शन के लिए STT 0.0125% से बढ़कर 0.02% हो जाएगा, जबकि ऑप्शन ट्रेडिंग पर 0.1% टैक्स लगेगा।
टी+2 बोनस शेयर ट्रेडिंग फ्रेमवर्क
सेबी ने पहले बोनस शेयरों के क्रेडिट और ट्रेडिंग के लिए उनकी एलिजिबिलिटी के लिए लगने वाले समय को रिकॉर्ड डेट से दो दिन तक कम करने का प्रस्ताव दिया था। 1 अक्टूबर से बोनस इश्यू की टी+2 ट्रेडिंग प्रभावी होगी। इसका मतलब है कि बोनस इश्यू में आवंटित शेयर अब रिकॉर्ड डेट के ठीक दो दिन बाद ट्रेडिंग के लिए उपलब्ध होंगे।
