SIP निवेशकों को पिछले दो सालों में मामूली या निगेटिव रिटर्न मिला है। हालांकि, इसके बावजूद हर महीने हजारों नए सिप अकाउंट खुल रहे हैं। अगर आप भी पहली बार SIP शुरू करने की सोच रहे हैं तो मन में कई सवाल को लेकर असमंजस होगा कि मंथली कितनी रकम निवेश करें? किस म्यूचुअल फंड स्कीम का चयन करें? कितनी अवधि के लिए निवेश का लख्य बनाए? अगर आप इन सवालों का जवाब ढूंढ रहे हैं तो परेशान होने की जरूरत नहीं है। हम आपको सभी सवालों का जवाब बहुत ही आसान भाषा में दे रहे हैं। इसके बाद आप आसानी से फैसला कर पाएंगे।
सिप से करोड़पति बने
SIP क्या है और कैसे काम करता है?
SIP शुरू करने से पहले, यह समझना बहुत जरूरी है कि SIP कैसे काम करता है? बता दें कि सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP), म्यूचुअल फंड स्कीम में एक तय राशि (आमतौर पर हर महीने) इन्वेस्ट करने का एक तरीका है। यह तरीका आपको डिसिप्लिन बनाने में मदद करता है, मार्केट की टाइमिंग का तनाव कम करता है और समय के साथ 'रुपया कॉस्ट एवरेजिंग' का फायदा उठाने देता है।
निवेश की रकम का चुनाव कैसे करें?
पहली बार निवेश करने वाले बहुत से लोग यह गलती करते हैं। वे बिना यह देखे कि क्या यह उनके लक्ष्यों के हिसाब से सही है, हर महीने निवेश करने के लिए कोई भी रैंडम रकम चुन लेते हैं। उदाहरण के लिए, मान लीजिए कि आप 5 साल में ₹10 लाख की कार खरीदना चाहते हैं। बिना हिसाब-किताब किए, हो सकता है कि आप कम निवेश करें और जरूरत से ज़्यादा खर्च कर बैठें। आप इस गलती को पहले ही ठीक सिप कैलकुलेटर के इस्तेमाल से ठीक कर सकते हैं। सिप कैलकुलेटर से आपको पता चल जाता है कि आपका लक्ष्य कितना व्यावहारिक है, और अगर नहीं है, तो आप निवेश की रकम या समय-सीमा बदल सकते हैं।
SIP शुरू करने से पहले इन बातों का ख्याल रखें
1. सिप शुरू करने से पहले आप तय करें कि आप किस चीज़ के लिए बचत कर रहे हैं, जैसे शादी, डाउन पेमेंट या अपने बच्चे की पढ़ाई, और पता करें कि इसमें कितना खर्च आएगा। फिर उसके अनुसार फंड और रकम तय करें।
2. ज्यादा उम्मीद वाले रिटर्न का इस्तेमाल करना आकर्षक लगता है क्योंकि इससे आंकड़े अच्छे दिखते हैं। बाजार हमेशा ऊपर नहीं जाता और रिटर्न हर साल बदल सकते हैं। बेहतर है कि आप एक रियलिस्टिक रिटर्न तय करें।
3. लोगों की आमदनी हर साल बढ़ती है, लेकिन उनका निवेश उतना ही रहता है। अगर आपके कैलकुलेटर में यह सुविधा है, तो 'स्टेप-अप' फीचर का इस्तेमाल करके देखें कि निवेश में थोड़ी सी बढ़ोतरी भी आखिर में कितना बड़ा फर्क ला सकती है।
4. आपकी आर्थिक स्थिति एक जैसी नहीं रहती, इसलिए आपका SIP प्लान भी वैसा ही नहीं रहना चाहिए। अगर आपकी सैलरी बढ़ती है, कोई नया खर्च आता है या आपके लक्ष्य बदलते हैं, तो कैलकुलेटर का दोबारा इस्तेमाल करके यह देखना अच्छा रहता है कि क्या आपकी निवेश की रकम अभी भी सही है।
