Gold-Silver Prices Crash: सुरक्षित निवेश का पसंदीदा विकल्प माने जाने वाले सोने और चांदी की कीमतों में एक बार फिर बड़ा क्रैश देखने को मिला है। पिछले कुछ समय से रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच रहे सोने और चांदी के भाव अचानक इतनी तेजी से नीचे गिरे हैं कि निवेशकों के पसीने छूट गए हैं। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर पिछले कारोबार में चांदी 10,577 रुपये प्रति किलोग्राम टूटकर 1,78,900 रुपये पर बंद हुई, जबकि सोने में 4,347 रुपये प्रति 10 ग्राम की बड़ी गिरावट दर्ज की गई और यह 1,38,419 रुपये पर आ गया। वैश्विक स्तर पर भी स्पॉट गोल्ड करीब 4% गिरकर 3,875.55 डॉलर प्रति औंस और स्पॉट सिल्वर 6% फिसलकर 49.12 डॉलर प्रति औंस के स्तर पर आ गई। इस भारी बिकवाली से घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में हलचल मच गई है।
सोने-चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट (तस्वीर-Canva)
क्यों हुआ सोने-चांदी की कीमतों में इतना बड़ा क्रैश?
सोने और चांदी के दामों में आई इस रिकॉर्ड गिरावट के पीछे सबसे मुख्य कारण ऊर्जा कीमतों (क्रूड ऑयल) में हुई बढ़ोतरी है, जिसने वैश्विक बाजार में फिर से महंगाई (इन्फ्लेशन) की चिंता बढ़ा दी है। जब महंगाई बढ़ती है, तो अमेरिकी फेडरल रिजर्व जैसे केंद्रीय बैंकों का रुख सख्त यानी 'हॉकिश' हो जाता है। अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने संकेत दिए हैं कि बढ़ती महंगाई को काबू में रखने के लिए ब्याज दरों को लंबे समय तक उच्च स्तर पर बनाए रखा जा सकता है, या दिसंबर में दरें और बढ़ाई जा सकती हैं। सोना और चांदी ऐसे एसेट्स हैं जिन पर ब्याज या नियमित रिटर्न नहीं मिलता है। जब ब्याज दरें ऊंची होती हैं, तो निवेशक सोने जैसी बिना ब्याज वाली संपत्तियों से पैसा निकालकर फिक्स्ड इनकम या ज्यादा ब्याज देने वाले साधनों में लगाने लगते हैं। अमेरिकी फेड द्वारा जल्द ब्याज दरें घटाने की उम्मीदें धूमिल होने से सोने-चांदी की मांग को बड़ा झटका लगा है और वैश्विक स्तर पर भारी बिकवाली देखने को मिली है।
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टेक शेयरों में गिरावट और चाइना फैक्टर ने बढ़ाई बिकवाली
धातुओं में गिरावट की दूसरी बड़ी वजह ग्लोबल स्टॉक मार्केट में आया टेक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित बड़ा क्रैश माना जा रहा है। शेयर बाजार में भारी नुकसान झेल रहे बड़े संस्थागत निवेशकों और ट्रेडर्स को अपने घाटे की भरपाई और कैश जुटाने के लिए सोने और चांदी जैसे तरल संपत्तियों को बेचना पड़ा। इसे मार्केट की भाषा में 'लिक्विडेशन' कहा जाता है। इसके अलावा, दुनिया के सबसे बड़े सोना उपभोक्ता देश चीन से भी ऐसी खबरें आई हैं कि वहां के निवेशकों ने नकदी जुटाने के लिए बड़े पैमाने पर सोना बेचा है। वहीं, चांदी की कीमतें सोने के मुकाबले अधिक इसलिए गिरीं क्योंकि चांदी का उपयोग सिर्फ निवेश के लिए ही नहीं, बल्कि सोलर पैनल और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे उद्योगों में भी होता है। औद्योगिक मांग में सुस्ती और शेयर बाजार में उथल-पुथल की वजह से चांदी में ज्यादा बिकवाली दर्ज की गई।
अपने ऑल-टाइम हाई रिकॉर्ड से कितना नीचे आ गए दाम?
इस अचानक आई गिरावट ने जनवरी में बने पिछले सभी रिकॉर्ड्स को ध्वस्त कर दिया है। इसी साल जनवरी महीने में चांदी ने 4,20,048 रुपये प्रति किलोग्राम का ऑल-टाइम हाई बनाया था, जहां से अब तक यह 50 प्रतिशत से अधिक टूट चुकी है। आपको बता दें कि साल 2025 में चांदी ने करीब 170% का जबरदस्त रिटर्न दिया था। दूसरी ओर, सोने के दामों में भी अपने उच्चतम स्तर से काफी बड़ी गिरावट देखी गई है। जनवरी 2026 में सोना 1,80,779 रुपये प्रति 10 ग्राम के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा था। अपने उस शिखर से सोना अब तक 42,321 रुपये प्रति 10 ग्राम नीचे आ चुका है और मार्च के बाद के सबसे निचले स्तरों पर कारोबार कर रहा है। उधर इंडियन बुलियन ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) के आंकड़ों के अनुसार 24 कैरेट सोने की कीमत घटकर 1,40,054 रुपये रह गई।
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क्या घरेलू बाजार में फिर लौटेगी सोने-चांदी की चमक?
कीमतों में भारी गिरावट और उतार-चढ़ाव के बावजूद भारतीय बाजार में आने वाले दिनों में सुधार की उम्मीद जताई जा रही है। भारत में नवंबर का महीना त्योहारी खरीदारी और शादियों के सीजन के लिए जाना जाता है। 6 नवंबर को आ रहे धनतेरस और उसके बाद आने वाली दिवाली व लग्न के चलते देश में फिजिकल गोल्ड और आभूषणों की घरेलू मांग में जबरदस्त तेजी आने की उम्मीद है।
इसके अलावा, दुनिया भर के केंद्रीय बैंक अभी भी लगातार अपने भंडार में सोने की खरीदारी कर रहे हैं, जिससे सोने की कीमतों को एक मजबूत सहारा मिलता रहेगा। जानकारों का मानना है कि शॉर्ट टर्म झटकों के बावजूद औद्योगिक मांग और घरेलू त्योहारी मांग के बल पर कीमती धातुओं के भावों में फिर से रिकवरी देखने को मिल सकती है।
